अदालत के पूछने पर आरोपी पठान ने अपना अपराध स्वीकार करने से इनकार करते हुए कहा कि वह निर्दोष है और वह मुकदमे का सामना करेगा। अदालत ने अभियोजन पक्ष को आरोपी के खिलाफ गवाह पेश करने का निर्देश दिया है ताकि मुकदमा शुरू किया जा सके।
पठान ने सुनवाई के दौरान इस आधार पर धारा 307 और 188 वापस लेने का आग्रह किया कि उसका पुलिसकर्मी की हत्या करने का कोई इरादा नहीं था और उसे सीआरपीसी की धारा 144 लागू होने के बारे में जानकारी नहीं थी।
अदालत ने नहीं मानी शाहरुख के वकील की दलील
अदालत ने राहत देने से इनकार करते हुए कहा कि दहिया के बयान से स्पष्ट है कि पठान ने उनके सिर पर बंदूक तान दी और गोली चलाई लेकिन वह बचने में सफल रहे। अदालत ने कहा कि आरोपी के वकील की यह दलील कि पठान ने पुलिसकर्मी को मारने की कोशिश नहीं कि बल्कि हवा में गोली चलाकर डराने की कोशिश की यह दहिया के बयान और वीडियो फुटेज के मद्देनजर धारा हटाने का आधार नहीं हो सकता है।
अदालत ने कहा आमतौर पर ट्रिगर को फायर करने या खींचने के बाद एक झटका लगता है और झटके के कारण हाथ और पिस्तौल ऊपर उठ जाते हैं। इस प्रकार यहां तक कि वीडियो में हेड कांस्टेबल दीपक दहिया को मारने के उद्देश्य से आरोपी शाहरुख पठान द्वारा दिन के उजाले में पिस्टल से फायरिंग करते हुए देखा गया है। उन्होंने आरोपी के वकील की इस दलील पर भी आपत्ति जताई कि पहली फायरिंग के बाद पठान के पास दहिया को मारने का दूसरा मौका था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ क्योंकि उसका इरादा नहीं था।
अदालत ने पठान के अलावा मामले में चार अन्य आरोपियों कलीम अहमद, इश्तियाक मलिक, शमीम और अब्दुल शहजाद के खिलाफ भी आरोप तय किए। दिल्ली में फरवरी, 2020 में दंगे के दौरान कम से कम 53 लोगों की मौत हो गई थी।