कोरोना से बचाने के लिए बच्चों के टीकाकरण अभियान को एक सप्ताह पूरा हो चुका है। परीक्षाओं के दौर में टीकाकरण की रफ्तार पर असर जरूर पड़ा है, लेकिन कोरोना के कारण दो साल तक घरों में कैद रहे बच्चों में वैक्सीन के प्रति जबरदस्त उत्साह भी दिख रहा है। भय और भ्रांतियों को दरकिनार कर बच्चों संग अभिभावक टीकाकरण केंद्रों का रुख कर रहे हैं। कुछ ऐसा ही उत्साह शुक्रवार को भी जिले में दिखाई दिया, जब टीका लगवाकर बच्चों ने ‘डर के आगे जीत है...’ का संदेश दिया। पेश है अमर उजाला संवाददाता योगेश शर्मा की यह रिपोर्ट...
दोनों डोज लगवाई, टीचर संग सेल्फी खिंचवाई
जिले के लगभग 23 सरकारी व निजी स्कूलों सहित स्वास्थ्य केंद्रों पर बच्चों का टीकाकरण किया जा रहा है। सेक्टर-62 के कार्ल हूबर स्कूल में बने टीकाकरण केंद्र में बिना घबराए उत्साहित बच्चे बारी का इंतजार करते दिखाई दिए। दोनों डोज लगवाने वाले बच्चों ने शिक्षकों के साथ सेल्फी खिंचवाकर खुशी का इजहार किया। स्कूल के 15 से 17 वर्ष के 581 बच्चे दोनों डोज ले चुके हैं। बच्चों का उत्साह बढ़ाने के लिए स्कूल में सेल्फी प्वाइंट भी बनाया गया है।
44 फीसदी किशोरों ने लगवाया टीका
जिले में 15 से 17 साल के 1,15,592 किशोरों के टीकाकरण का लक्ष्य शासन ने निर्धारित किया है। इनमें 44 फीसदी यानी 50,668 किशोरों को दोनों डोज दी जा चुकी है। अब 28 मार्च से 2 अप्रैल के बीच मेगा टीकाकरण अभियान चलाकर जिले के 100 से अधिक केंद्रों पर 12 से 14 और 15 से 17 वर्ष के बच्चों के टीकाकरण पर जोर दिया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से इसकी तैयारियां शुरू हो गई हैं। कोविन पोर्टल पर सभी केंद्रों की जानकारी उपलब्ध होगी।
पहले दिन 100, अब 4200 का आंकड़ा पार
16 मार्च को 12 से 14 वर्ष के बच्चों का टीकाकरण शुरू हुआ था। पहले दिन 100 बच्चों ने कोर्बेवैक्स वैक्सीन की पहली डोज लगवाई थी। अब यह आंकड़ा 4200 को पार कर चुका है। हालांकि, 15 अप्रैल तक तय लक्ष्य के मुताबिक 69,814 बच्चों को वैक्सीन की पहली डोज देने का दावा स्वास्थ्य विभाग की तरफ से किया जा रहा है, लेकिन बच्चों को कोरोना से सुरक्षित करने के लिए अभिभावकों को अहम भूमिका निभानी होगी।
घबराएं नहीं, सुरक्षित है वैक्सीन
बच्चों को वैक्सीन लगवाने में कुछ अभिभावकों को हिचक महसूस हो रही है, लेकिन विशेषज्ञों ने कोरोना से बच्चों को बचाने के लिए वैक्सीन का ही विकल्प सुझाया है। किशोरों के लिए वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है। ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया व अन्य संस्थानों से प्रमाणित होने के बाद ही बच्चों की वैक्सीन को मंजूरी मिली है। वैक्सीन लगने के बाद सुस्ती, बुखार और थकान जैसे कुछ हल्के लक्षण दिख सकते हैं, लेकिन इससे घबराने की जरूरत नहीं है। -डॉ. डीके सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी-चाइल्ड पीजीआई, नोएडा
अभिभावकों में जागरूकता जरूरी
जनवरी में जब बच्चों का टीकाकरण शुरू हुआ, तब से ही अभिभावकों को जागरूक करने का काम स्कूल प्रशासन की तरफ से किया जा रहा है। कक्षा 9वीं से 12वीं तक के सभी बच्चों को दोनों डोज लगवा दी गई है। अब 12 से 14 साल तक के बच्चों के टीकाकरण को बढ़ावा देने की मुहिम छेड़ी है। कोरोना की वजह से दो साल बच्चों की पढ़ाई बाधित हुई। ऐसा फिर से न हो इसलिए बच्चों का टीकाकरण जरूरी है। -स्मिता मिश्रा, प्रिंसिपल, कार्ल हूबर स्कूल, नोएडा
उत्साहित बच्चे बोले
जब बच्चों की वैक्सीन नहीं आई थी तो डर था कि महामारी के बीच हमारे भविष्य का क्या होगा। अब वैक्सीन की दोनों डोज लगने के बाद राहत मिली है। वैक्सीन लगवाने के बाद मुझे किसी तरह की परेशानी नहीं हुई।
-माधवी शुक्ला, छात्रा
कोरोना से बचाव के लिए वैक्सीन बेहद जरूरी है। इससे हम ही नहीं, बल्कि हमारा परिवार भी सुरक्षित होगा। बच्चों की पढ़ाई का नुकसान न हो, इसके लिए अभिभावक बच्चों को वैक्सीन जरूर लगवाएं। -
श्रेहा, छात्रा
आज ही कोर्बेवैक्स वैक्सीन की पहली डोज लगवाई है। अब दूसरी डोज लगने का इंतजार रहेगा। वैक्सीन लगने के बाद भी मास्क पहनूंगी और कोरोना से बचाव के नियमों का पालन करूंगी।
-श्रुति-छात्रा
बच्चों के टीकाकरण पर एक नजर
आयु लक्ष्य पहली डोज दूसरी डोज
12-14 69,814 4,238
15-17 1,15,592 91,095 50,668