दिल्ली राज्य चुनाव आयोग ने तीनों नगर निगम के चुनाव अप्रैल माह में कराने का ऐलान किया है। हालांकि, आयोग ने चुनाव की तिथि की घोषणा नहीं की है। चुनाव आयोग ने तीनों नगर निगम के चुनाव के लिए उनके मतदान केद्रों की सूची तैयार कर दी है। इतना ही नहीं आयोग ने कोरोना महामारी के मद्देनजर एक मतदान केंद्र पर मतदाताओं की संख्या 1250 से कम रखने का निर्णय लिया है।
दिल्ली राज्य चुनाव आयोग ने पांच जनवरी 2022 का जारी हुई मतदाता सूचियों के अनुसार तीनों नगर निगम के चुनाव अप्रैल माह में कराने का निर्णय लिया है। इस तरह अब मतदाताओं सूचियों में न तो नए नाम शामिल होंगे और न ही कोई नाम काटा जा सकेगा। दिल्ली निर्वाचन कार्यालय ने एक जनवरी 2022 को योग्यता तिथि के मद्देनजर मतदाता सूची तैयार की थी। चुनाव आयोग ने सभी 72 रिटर्निंग अधिकारियों से उनके अधीन दिए गए वार्डों के लिए पर्याप्त मात्रा में मतदान केंद्रों का प्रावधान कराया है और मतदान केंद्रों की सूचियों को मतदान क्षेत्रों और मतदाताओं के समूह के अनुसार मतदान केंद्र बनवाए हैं। इस दौरान कोरोना महामारी की स्थिति का ध्यान रखते हुए प्रति मतदान केंद्र पर मतदाताओं की सीमा अधिकतम 1250 निर्धारित की गई।
चुनाव आयोग के अनुसार तीनों नगर निगम के वार्डों से संबंधित मतदान केंद्रों की सूची रिटर्निंग अधिकारी 23 फरवरी को अपने कार्यालय में प्रकाशित करेंगे। उनके कार्यालय में आम लोग, चुनाव लड़ने के इच्छुक नेता और राजनैतिक दलों के प्रतिनिधि उनका निरीक्षण कर सकेंगे। इसके अलावा वे 28 फरवरी तक कोई भी सुझाव एवं आपत्ति दे सकेंगे।
तीनों नगर निगम में है 272 वार्ड
तीनों नगर निगम में 272 वार्ड है और 50 प्रतिशत वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षि है। उत्तरी दिल्ली और दक्षिण दिल्ली नगर निगम में 104-104 वार्ड है, जबकि पूर्वी दिल्ली नगर निगम में 64 वार्ड है। उत्तरी दिल्ली नगर निगम के 104 वार्डों में 20 वार्ड अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किए गए हैं। दक्षिण दिल्ली नगर निगम में 15 वार्ड अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है और पूर्वी दिल्ली नगर निगम में 11 वार्ड अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किए हैं।
15 साल से नगर निगम में भाजपा का है शासन
नगर निगम में पिछले 15 साल से भाजपा का शासन है। उसने वर्ष 2007 में एकीकृत नगर निगम के समय सत्ता हासिल की थी। वर्ष 2012 में नगर निगम का तीन हिस्सों में विभाजन होने के बाद इस साल हुए चुनाव में भी भाजपा ने जीत हासिल की। इन दोनों चुनाव में भाजपा एवं कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर हुई थी, जबकि वर्ष 2017 में भाजपा ने तीकाने मुकाबले में बाजी मारी थी। इस बार कांग्रेस के अलावा दिल्ली सरकार में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी ने भी चुनाव लड़ा था। तीनों नगर निगम में आम आदमी पार्टी दूसरे स्थान पर रही थी। तीसरे स्थान पर रही कांग्रेस एवं उसके बीच सीटों का अंतर बहुत ही कम रहा था।