डेढ़ साल से अटकी कॉर्निया प्रत्यारोपण में ड्रोन के इस्तेमाल की योजना एक बार फिर शुरू की जा रही है। इसमें सबसे पहले एम्स और सफदरजंग अस्पताल के बीच कनेक्टिविटी जांची जाएगी। इसके लिए दिल्ली एम्स के डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेत्रविज्ञान संस्थान (आरपी सेंटर) ने आईआईटी विशेषज्ञों के साथ मिलकर कार्य शुरू कर दिया है।
आरपी सेंटर के प्रमुख डॉ. जेएस तितियाल ने बताया कि ड्रोन को तैयार करने के बाद यदि एम्स और सफदरजंग अस्पताल के बीच उड़ान सफल रही तो आरएमएल और लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज को भी एम्स से जोड़ा जाएगा। हालांकि इन अस्पतालों के बीच संसद और राष्ट्रपति भवन भी है। इसलिए राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रेसीडेंट इस्टेट इत्यादि से अनुमति लेने में भी समय लग सकता है।
डॉ. तितियाल ने बताया कि अभी तक कॉर्निया यातायात के लिए ग्रीन कॉरिडोर की मदद लेनी पड़ती है। इसमें स्थानीय प्रशासन से लेकर अस्पताल और कॉर्निया निकालने तक कई जगहों पर प्रक्त्रिस्या में समय लगता है। ड्रोन के इस्तेमाल से इन दिक्कतों से बचा जा सकता है। कोरोना महामारी आने के बाद से कॉर्निया प्रत्यारोपण में करीब 80 फीसदी कमी दर्ज की गई है। हालांकि सरकार हर साल एक लाख से भी अधिक दृष्टिहीन लोगों के जीवन में रोशनी लाने का प्रयास कर रही है।