शाखा ने मामले की जांच शुरू की। जांच में पता चला कि कंपनी ने वर्ष 2014 में परियोजना की शुरुआत की, जिसके तहत बुकिंग के 30 माह के भीतर निवेशकों को दुकान देने का वादा किया गया। पुलिस को नोएडा प्राधिकरण से जानकारी मिली कि कंपनी साल 2015 में बिल्डिंग प्लान के अप्रूवल के लिए आवेदन किया था, जिसे कंपनी को कुछ आपत्तियों के साथ वापस कर दिया गया था और उन्हें संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था। निर्धारित अवधि के भीतर कंपनी के जवाब नहीं देने पर आवेदन को खारिज कर दिया गया। जांच में पता चला कि दंपति कंपनी के प्रमोटर, निदेशक और शेयरधारक हैं। उसके बाद पुलिस टीम ने सोमवार को दंपत्ति को गिरफ्तार कर लिया।