यह याचिका पश्चिम पंजाबी बाग में ब्रीद फाइन लाउंज और बार, टीओएस, आर हाई स्पीडबार और लाउंज, बरामदा चांदनी और सिक्स एम्पिरिका लाउंज द्वारा दायर की थीं। याचिका में तर्क रखा था कि वे हर्बल हुक्के परोस रहे हैं जिसके लिए कोई लाइसेंस की जरूरत नहीं है क्योंकि वे पूरी तरह से तंबाकू के बिना हैं लेकिन पुलिस अभी भी छापे मार रही थी, उपकरण जब्त कर रही थी और चालान कर रही थी।
दिल्ली सरकार ने किया था याचिका खारिज करने का आग्रह
दिल्ली सरकार ने कोविड के चलते हर्बल हुक्का पर प्रतिबंध को उचित ठहराते हुए याचिका खारिज करने का आग्रह किया था। अदालत ने सरकार के तर्क को खारिज करते हुए कहा कि अब आपने सब कुछ खोल दिया है। सिनेमा हॉल, स्विमिंग पूल पूरी क्षमता से खोल दिए गए है। आप हुक्के पर प्रतिबंध लगाना चाहते हैं, आप ऐसा कर सकते हैं लेकिन कोविड के आधार पर नहीं। अदालत ने दिल्ली सरकार के वकील संतोष कुमार त्रिपाठी से कहा, क्या हो रहा है? इन लोगों (याचिकाकर्ताओं) को जीवित नहीं रहना है? आप आजीविका की कीमत पर इस तरह के प्रतिबंध नहीं लगा सकते।
दिल्ली सरकार के वकील ने आधिकारिक रुख दोहराया कि हर्बल हुक्का को बेचने और अभी के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती । वहीं याचिकाकर्ताओं का कहना था कि हर्बल हुक्के की बिक्री और इस्तेमाल पर रोक जारी रखना अनुचित है। उच्च न्यायालय ने इससे पहले दिल्ली सरकार को प्रतिबंध पर पुनर्विचार करने और हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया था। अदालत ने मामले की सुनवाई 9 फरवरी 2022 तय की है।