केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कुआलालंपुर के बाद दिल्ली मेट्रो का विश्व में चौथे स्थान पर है। दिल्ली मेट्रो का ड्राइवरलेस मेट्रो 97 किमी से थोड़ा अधिक है और यह मलेशिया की राजधानी से महज आधे किलोमीटर कम है। दिल्ली मेट्रो न केवल देश का गौरव बल्कि स्वचालित प्रणाली के मामले में भी अग्रणी है। दिल्ली मेट्रो में कोविड से पहले रोजाना करीब 65 लाख यात्राएं हो रही थी। अब 100 प्रतिशत बैठने की क्षमता के बाद प्रत्येक कोच में 30 यात्रियों के खड़े होकर सफर की इजाजत मिलने के बाद यात्रियों की संख्या में फिर बढ़ोतरी होगी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि फिलहाल देश के 18 शहरों में 723 किमी के दायरे में मेट्रो नेटवर्क है। अलग अलग शहरों में 1,000 किमी से अधिक पर मेट्रो का निर्माण चल रहा है। अभी भी छह नए प्रस्तावों पर विचार किया जा रहा है।
मानवीय हस्तक्षेप होगा कम, खामियों की गुंजाइश भी
हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि डीटीओ ट्रेन संचालन में सेवाओं में लचीलापन आएगा। मानवीय हस्तक्षेप के साथ त्रुटियां भी कम होंगी और कोच में अधिक जगह भी उपलब्ध होने से यात्रियों को सहूलियत मिलेगी। डीएमआरसी के मुताबिक इन ट्रेनों के परिचालन से पहले होने वाली जांच की प्रक्रिया खत्म हो जाएगी। मेट्रो पूरी तरह स्वचालित होगी, इससे ट्रेन ऑपरेटरों का बोझ भी कम होगा। इतना ही नहीं, रात के वक्त सेवाएं खत्म होने के बाद मेट्रो खुद ब खुद डिपो तक भी पहुंचेगी। यह प्रक्रिया पूरी तरह मानवरहित होगा। मजेंटा लाइन (जनकपुरी पश्चिम से बॉटेनिकल गार्डन) के बीच चालक रहित मेट्रो के संचालन में भी काफी बदलाव आया है। पिंक लाइन पर भी शुरुआत में यात्रियों और ट्रेन संचालकों में विश्वास और सहायता के लिए ट्रेन ऑपरेटर मौजूद रहेंगे। धीरे धीरे पूरी लाइन की केवल ड्राइवरलेस मेट्रो का ही परिचालन होगा। इससे ट्रेनों की फ्रिक्वेंसी भी जरूरत के मुताबिक बदली जा सकती है। इस तकनीक से फ्रिक्वेंसी 90 सेंकेंड तक की जा सकती है।