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ठगी का निशाना बने लोगों से धोखाधड़ी में 12 गिरफ्तार

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नई दिल्ली। पुलिस की स्पेशल सेल की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रेटजिक ऑपरेशंस (आईएफएसओ-साइबर क्राइम यूनिट का नया नाम) ने सरकारी पोर्टल से मिलते-जुलते नाम वाली वेबसाइट बनाकर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश कर दो युवतियों समेत 12 आरोपियों को नोएडा से गिरफ्तार किया है। ये ठगी के पीड़ितों को ठगते थे। गिरोह पिछले तीन में 3000 से ज्यादा लोगों से दो करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी कर चुका है। इनके पास से सात लैपटॉप, 25 मोबाइल फोन, एक अर्टिगा कार और 52,500 नकदी बरामद की गई है।
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डीसीपी (आईएफएसओ) केपीएस मल्होत्रा ने बताया कि कुछ जालसाजों के सरकारी से मिलती-जुलती वेबसाइट बनाकर खुद को सरकारी अधिकारी बता ठगी का निशाना बने लोगों से फिर ठगी की शिकायत मिली थी। शिकायतकर्ता सौरभ ने कहा कि वे अपने साथ हुई धोखाधड़ी की वारदात के बारे में जन सुरक्षा केंद्र नामक वेबसाइट पर शिकायत कर रहे थे। इसे अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल बताया गया था। पोर्टल पर दिए नंबर पर उन्होंने फोन किया तो रिसीव करने वाले ने कहा कि वह सरकार के साथ काम करने वाले अधिकृत व्यक्ति हैं और उनकी शिकायत दर्ज करेंगे। इसके नाम पर उसने सौरभ से 2850 रुपये वसूल लिए। इसके बाद उन्होंने सौरभ का नंबर ब्लॉक कर दिया।
आईएफएसओ में मामला दर्ज कर इंस्पेक्टर मनोज कुमार की टीम ने जांच में पाया कि ठगी का निशाना बने लोगों को जालसाज फिर ठग रहे हैं। इसके लिए वे खुद को सरकार से अधिकृत कर्मचारी बता रहे हैं। वेबसाइट और संलग्न पेमेंट गेटवे के तकनीकी डाटा का विश्लेषण किया गया। इसी तरह की 7 और शिकायतें राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज की गईं। एक प्राथमिकी कर्नाटक में भी दर्ज मिली। भुगतान गेटवे का बैंक खाता विवरण एकत्र कर विश्लेषण से पता चला कि एक साल में जालसाज 1.74 करोड़ रुपये ठग चुके हैं।
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सभी आरोपी यूपी में नोएडा से गिरफ्तार हुए। इसमें पी सिंह (23 ), एस पांडे (23), ओबी श्रीवास्तव (23 वर्ष), रीना (बदला नाम) (23), सुमन (22), पीडी कुमार उर्फ सिद्धार्थ (23), ए कुमार (30), दिल्ली के कालकाजी निवासी ए. शर्मा (25), के सिंह (25), ए अली (22), सीलमपुर निवासी एम. वसीम (23) और गोविंदपुरी निवासी एम नदीम (27) हैं। पी. सिंह, एस. पांडे और रीना मास्टरमाइंड हैं। ओबी श्रीवास्तव पार्टनर है। बाकी सब कॉल सेंटर मेें फोन रिसीव करते थे।
गिरोह ने सरकारी पोर्टल जैसे जन सुरक्षा केंद्र से मिलते-जुलते नाम वाला पोर्टल बना रखा था। ये अपनी साइट में कुछ ऐसी सेटिंग करते थे कि गूगल सर्च में यह सबसे ऊपर दिखती थी। ठगी का पीड़ित इस पोर्टल पर दिए गए नंबर पर बात करता तो ये शिकायत दर्ज करने के नाम पर उससे रुपये ऐंठ लेते थे। इसके बाद वे पीड़ित के नंबर को ब्लॉक कर देते थे।
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