इन शिक्षण संस्थानों को मंजूरी
वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, केंद्रीय विद्यालय, नवोदय, सरकारी और निजी स्कूल, आईआईटी, एनआईटी, आईआईएम, इंजीनियरिंग, फार्मेसी, मैनेजमेंट, आर्किटेक्चर,कॉलेज समेत अन्य विश्वविद्यालय शामिल हैं। इन सभी शिक्षण संस्थानों में खाली समय में जब लैब और संसाधनों का प्रयोग नहीं हो रहा होगा, तब वोकेशनल कोर्स के माध्यम से उन लैब से जुड़े कोर्स करवाए जा सकेंगे। शिक्षण संस्थानों के ही शिक्षक यह वोकेशनल कोर्स करने में मदद करेंगे। उन शिक्षकों को इस काम के बदले अतिरिक्त वेतन का फैसला संबंधित शिक्षण संस्थान खुद करेंगे। हालांकि, स्किल इंडिया इसके बदले बाकायदा इन शिक्षण संस्थानों को पैसा देगा।
इस प्रकार के कोर्स
शिक्षण संस्थानों में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, कंप्यूटर आपरेटर, लैब अस्सिटेंट, ऑफिस अटेंडेंट जैसे कोर्स से लेकर विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े कोर्स भी करवाए जाएंगे। इसके अलावा स्थानीय एरिया के कलाकारों, बुनकरों, शिल्पकारों समेत अन्य को भी उनके विषय से जुड़े कोर्स करवाने के लिए भी आमंत्रित किया जाएगा, ताकि छात्र अपनी पसंद के आधार पर स्किल को चुन सकें।
डिग्री और सर्टिफिकेट में क्रेडिट जुड़ेंगे
नेशनल काउंसिल फॉर वोकेशनल एजुकेशन एंड ट्रेनिंग (एनसीवीईटी) ने जिन 720 कोर्स की पढ़ाई व ट्रेनिंग की मंजूरी दी है, वह 200 घंटे से लेकर 600 घंटे के क्रेडिट वाले हैं। इसमें छात्र जितने घंटे के कोर्स करेगा, उसके क्रेडिट उसके स्कूली सर्टिफिकेट और उच्च शिक्षा की डिग्री में भी जुड़ेंगे। इसके लिए सीबीएसई, प्रदेश शिक्षा बोर्ड, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद समेत अन्य हितधारक मदद करेंगे।