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Soumya Murder Case: टैटू से पहुंचा हत्यारों तक पुलिस का हाथ, जिगिशा के क्रेडिट कार्ड से बदमाशों को ऐसे पकड़ा

Thu, 19 Oct 2023 06:58 AM IST
विजय पुंडीर पुरुषोत्तम वर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पुरानी बीट प्रणाली से पुलिसिंग करने वाले उस समय वसंत विहार थाने में तैनात सिपाही कप्तान सिंह (अब एएसआई) को फायदा मिला। सरोजनी नगर मार्केट की उस दुकान की जहां से आरोपियों ने खरीदारी की, सीसीटीवी की फुटेज निकाली गई तो वसंत विहार पुलिस स्टेशन में तैनात सिपाही कप्तान सिंह ने बदमाश बलजीत उर्फ मलिक की फोटो पहचान ली।
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सौम्या विश्वनाथन (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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टीवी पत्रकार सौम्या विश्वनाथन व बीपीओ कर्मी जिगिशा घोष हत्याकांड में शुरुआत में पुलिस के पास कोई सुराग नहीं था। दोनों ही हत्याकांड का खुलासा पुलिस की पुरानी बीट प्रणाली और दोषियों के हाथ पर बने टैटू से हुआ था। साथ ही गिरोह सरगना रवि कपूर ने जिगिशा घोष के क्रेडिट कार्ड से कपड़ों, चश्मे व अन्य सामान की खरीदारी की थी। यहां पर आरोपी सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गए थे। जिगिशा हत्याकांड में जब पुलिस ने आरोपियों को पकड़ा तो सौम्या विश्वनाथन हत्याकांड का भी खुलासा हो गया। कड़ी पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया था कि सौम्या की हत्या भी उन्होंने की है।

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पुरानी बीट प्रणाली से पुलिसिंग करने वाले उस समय वसंत विहार थाने में तैनात सिपाही कप्तान सिंह (अब एएसआई) को फायदा मिला। सरोजनी नगर मार्केट की उस दुकान की जहां से आरोपियों ने खरीदारी की, सीसीटीवी की फुटेज निकाली गई तो वसंत विहार पुलिस स्टेशन में तैनात सिपाही कप्तान सिंह ने बदमाश बलजीत उर्फ मलिक की फोटो पहचान ली। बलजीत मसूदपुर गांव में रहता है। इसके बाद पुरानी बीट प्रणाली की तर्ज पर इलाके के लोगों से मुखबिरी करवाई गई और बदमाश पुलिस के हत्थे चढ़ गए। पुलिस अधिकारियों के अनुसार इससे पहले सिपाही कप्तान सिंह मसूद गांव की बीट में तैनात थे। गांव में वह गश्त करने के दौरान सभी से भली भाती परिचित थे।

बलजीत की शक्ल भाई से मिलती थी
पुलिस अधिकारियों के अनुसार बलजीत व उसके भाई की शक्ल मिलती-जुलती थी। ऐसे में दोनों में से आरोपी की पहचान करना संभव नहीं था। सिपाही कप्तान सिंह को पता था कि बलजीत के हाथ पर उसके नाम का टैटू व नाम गुदा है। इसके बाद उसे पकड़ लिया। बलजीत को गिरफ्तार करने के बाद बाकी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। बाकी आरोपियों को डोजियर खंगाला गया था।
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जिगिशा के क्रेडिट कार्ड से हुई थी खरीदारी
जिगिशा के क्रेडिट कार्ड से वारदात वाले दिन दोपहर डेढ़ बजे तक खरीदारी आदि हुई है। नोएडा के एक कंपनी में ऑपरेशन मैनेजर के पद पर काम करने वाली व वसंत विहार की पीडब्लूडी कॉलोनी में रहने वाले 27 वर्षीय जिगिशा 18 मार्च 2009 की सुबह कॉलोनी के बाहर से लापता हो गई थी। उसका शव सूरजकुंड की पहाडियों में मिला था। जिगिशा का मोबाइल व बैग आदि गायब था। उसके क्रेडिट कार्ड से 18 मार्च को दोपहर तक इस्तेमाल किया गया था।

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18 मार्च 2009 को कब-कब जिगिशा का क्रेडिट कार्ड यूज हुआ
  • सुबह 5.12 बजे- महिपालपुर में जिगिशा के कार्ड से एटीएम से 20 हजार रुपये निकाले गए।
  • सुबह 6.24 बजे- साकेत स्थित एटीएम से 5 हजार रुपये निकाले गए।
  • सुबह 11.54 बजे-सरोजनी मार्केट से चश्मे खरीदे गए।
  • दोपहर 1.19 बजे- 14500 रुपये की कीमत के जूते खरीदे गए।
  • दोपहर 1.20 बजे- 36 हजार रुपये की कीमत की घड़ी सरोजनी नगर मार्केट से खरीदी गई।
18 मार्च
  • तड़के 3.45 बजे- जिगिशा ने ऑफिस छोड़ा और अपनी मां को फोन किया। फोन पर उसने मां को ब्रेकफास्ट तैयार करने के लिए कहा।
  • तड़के 4.00 बजे- रास्ते में उसके पास सहयोगी का फोन आया। दोनों की करीब आधा घंटे बात हुई थी।
  • सुबह 4.30 बजे- ऑफिस की कैब ने उसे कॉलोनी के बाहर छोड़ा।
  • सुबह 4.31- कुछ लोगों ने उसका अपहरण किया और महिपालपुर की तरफ ले गए। इस दौरान जिगिशा को धमकाकर कार्ड का पासवर्ड पूछा।
19 मार्च- जिगिशा के पिता ने वसंत विहार पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई।
20 मार्च- जिगिसा का शव बडकल लेक के पास सूरजकुंड की पहाडियों में मिला था।

जिगिशा के साथ जानवरों जैसा व्यवहार किया था
दिल्ली पुलिस अधिकारियों के अनुसार जिगिशा घोष वसंत विहार में एयर इंडिया कॉलोनी के पास रहती थी। कैब से उतरने के बाद वह कॉलोनी में अंदर जाने के बजाय गेट पर ही मोबाइल पर बात करने लग गई। इस दौरान आरोपियों ने जिगिशा को उठाकर कार में डाल लिया था। आरोपी वीपीओ कर्मी को महिपालपुर ले गए। यहां उसे एटीएम से पैसे निकालने के बाद जिगिशा को दोनों सीट के बीच डाल कर लिया दिया था और सभी उसके ऊपर पैर रखकर बैठ गए थे। जिगिशा दर्द से कराहती रही, मगर बदमाशों को तरस नहीं आया। वह उसे फरीदाबाद में बड़कल लेक के पास ले गए और उसकी गला दबाकर हत्या कर दी। शव को वहीं फेंक दिया था।
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