जब होश आया तो बेटों के साथ भतीजे की मौत की खबर मिली। सरस्वती दिल्ली लौट आई हैं। परिजन उन्हें दिलासा देने का प्रयास कर रहे हैं। 11 महीने पहले ही सरस्वती के पति की कैंसर से मौत हुई थी। एक परिजन ने बताया कि चार भाई सुनील कुमार, अनिल, संजय और राकेश तुर्कमान गेट के नजदीक आसफ अली रोड, हमदर्द चौक पर रहते थे। सरस्वती और पति सुनील ने 30 साल पहले पुश्तैनी मकान छोड़कर बदरपुर के लक्कड़पुर फाटक के पास मकान बना लिया था।
सरस्वती परिवार में दो शादीशुदा बेटियां स्वाति और रवीना व बेटे अर्जुन व देवेंद्र थे। अर्जुन की शादी हुई थी, लेकिन किसी वजह से दो साल पहले तलाक हो गया था। अर्जुन व देवेंद्र निजी कंपनी में नौकरी करते थे, लेकिन कुछ माह पूर्व दोनों की नौकरी छूट गई थी। वहीं, रोहित उर्फ मोहित के परिवार में पिता संजय कुमार के अलावा 13 साल की छोटी बहन सिमरन है। मां ऊषा की कई साल पहले कैंसर से मौत हो गई थी। रोहित अजमेरी गेट के एक नर्सिंग होम में छोटा-मोटा काम करता था। पिता संजय अजमेरी गेट पर अंडे की रेहड़ी लगाते हैं।
सोमवार को दिल्ली लौटना था
कुछ दिनों से सरस्वती बेटों से हरिद्वार चलने के लिए कह रही थीं। दोनों भाई मां को ले जाने के लिए तैयार हुए तो रोहित ने भी साथ चलने की इच्छा जताई। तीनों भाई व सरस्वती अजमेरी गेट गोलचक्कर से शनिवार रात करीब 1:30 बजे हरिद्वार की बस में सवार हुए थे। चारों को सोमवार को दिल्ली लौटना था, लेकिन रास्ते में ही हादसा हो गया। रविवार को तीनों भाइयों के घरों पर रिश्तेदारों का तांता लगा हुआ था। किसी को भी यकीन नहीं हो रहा था कि ऐसा भी हो सकता है। परिजनों को अब सरस्वती देवी की चिंता रही थी।