ऐसे पकड़े गए आरोपी
पुलिस ने सबसे पहले टेक्निकल सर्विलांस की मदद से जांच शुरू की तो कॉलर की लोकेशन निहाल विहार डी-ब्लॉक की मिली। आरोपी वहां से भी गायब मिला। काफी पड़ताल के बाद उसकी लोकेशन ए-ब्लॉक निहाल विहार की मिली। महिला हवलदार सोनिका को कूरियर डिलीवरी के नाम पर उस पते पर भेजा गया। इशारा मिलने पर टीम ने आरोपी को दबोच लिया। आरोपी की पहचान नूर मोहम्मद उर्फ फिरोज के रूप में हुई। उसकी निशानदेही पर बाकी दोनों आरोपी मनीष सैमसन और धर्मवीर चड्ढा को भी गिरफ्तार कर लिया गया।
ऐसे की जाती थी ठगी
मनीष निजी बैंक में मैनेजर है। वह बैंक में आए ग्राहकों के दस्तावेजों के आधार पर फर्जी कंपनियां और बैंक खाते खोल लेता है। इसके बाद उस कंपनी के नाम से एक किराए की जगह लेकर वहां एक या दो माह के लिए उसका ऑफिस खोला जाता है। इंडिया मार्ट से रजिस्टर थोक कारोबारियों से संपर्क कर उनसे माल खरीदा जाता है। ऑन लाइन पेमेंट के नाम पर उनको फर्जी रसीद भेज दी जाती है। सामान को फर्जी कंपनी के नाम और पते पर मंगाया जाता है। जब तक पीड़ित को ठगी का पता चलता है कि आरोपी माल समेत वहां से फरार हो जाते हैं। बाद में इस माल को मार्केट में बेच दिया जाता है।
अमन संभालता है मैनेजर का काम
अमन कपूर हमेशा दफ्तर में मैनेजर का काम संभालता है, उसकी अंग्रेजी बेहतर है। इसके अलावा रिमपल और नूर मोहम्मद का काम फर्जी कंपनियों के लिए अस्थाई दफ्तर का इंतजाम करना है। एक अन्य आरोपी राजेंद्र अरोड़ा का काम ठगे गए सामान को मार्केट में बेचना है। उसके बाद ठगी की रकम को आपस में बांट लिया जाता हैं। पुलिस पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ कर इनके बाकी साथियों की तलाश कर रही है।