मेवात जिले में कुल 43 गांव बेचिराग हैं, जिनमें से 10 गांव बस चुके हैं, फिर भी सरकारी रिकॉर्ड में ये गांव अभी भी बेचिराग घोषित हैं। जिन बेचिराग गांवों में आबादी हो चुकी है सरकार ने राजस्व विभाग से उनकी स्टेटस रिपोर्ट मांगी हैं। मेवात का राजस्व विभाग रिपोर्ट तैयार करने में जुट गया है।
मेवात के बाकी बचे इन 33 गावों को आप ढूंढते रह जाओगे, कारण साफ है जिले में ये गांव तो हैं पर इनका न तो वजूद है और न ही इनमें आबादी। कुदरत के कहर से ये गांव तबाह हो गये या फिर यहां बसने वाले लोग अंग्रेजों के डर से कहीं चले चले गये या इन गांवों को अंग्रेजों ने 1857 की क्रांति के बाद पूरी तरह उजाड़ दिया।
आज इन गांवों में आबादी तो नहीं है लेकिन आबादी निशानी के तौर पर कुछ पुराने खंडहर यहां रहने वालों कि दास्तां जरूर बयान करते हैं। इसी वजह से इन गांवों को राजस्व रिकॉर्ड में बेचिराग गांव घोषित कर रखा है।
इन गांवों की अपनी जमीन और अपना हदबस्त नंबर भी सरकार ने दे रखा है। मेवात के सदर कानूनगो जान मोहम्मद का कहना है कि उनके पास फिलहाल 1938-39 के हदबस्त का रिकॉर्ड है जहां इन गांवों को बेचिराग घोषित कर रखा है।
443 गांवों में 43 बेचिराग
प्रतीकात्मक चित्र
- फोटो : amar ujala
आप को बता दें कि मेवात जिले के नूंह खंड में 119, पुन्हाना खंड में 96, फिरोजपुर झिरका में 77, नगीना में 69 और तावडू में 82 गांवों सहित कुल 443 गांव हैं जिनमे से 43 गांव बेचिराग हैं।
मेवात के सदर कानूनगो जान मोहम्मद का कहना है कि इन 43 गांवों में 1938-39 की हदबस्त के दौरान आबादी नहीं थी बल्कि जिन गांवों के पास अपनी जमीन थी उनको हदबस्त नंबर दे दिया गया था। मेवात के बेचिराग गावों के नाम, लोगों के नाम पर हैं।
मसलन पुन्हाना खंड के ही गांव अहमदबास, कासमपुर, समदखेड़ा के नाम से पता चलता है कि इन गांवों को अहमद, कासम और समद ने बसाया होगा। इससे यह जाहिर होता है कि ये गांव जरूर रहे होंगे।
गांव तेड के बुजुर्ग और पूर्व सरपंच सुपेद खा ने बताया कि इन गावों में पहले आबादी हुआ करती थी, आज भी उनके गांव से दो किलोमीटर दूर पर स्थित बेचिराग खेड़ली-खेड़ा गांव में खोदने पर पुराने मिट्टी के बर्तन और कई सामान मिलते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि जिन लोगों ने हदबस्त के दौरान अपने कब्जे वाली जमीन की जमा (सरकारी टेक्स) भरी थी सरकार ने इन गांवों कि जमीन उन्हीं के नाम कर दी थी।
ये हैं मेवात जिले के बेचिराग गांव
प्रतीकात्मक चित्र
नूंह खंड-17 - चांदाकी, डूंडाहेडी, जखोपुर, दुर्गापुर, भाटका, सूगरपुर, नारायणपुर, तहसीमपुर, बहादुरी, शेरपुर-कालाहेडी, मौजपुर, प्रतापनगर, शादीपुर, औसरिका, रामपुराबाद, नल्हड़ (आबाद), ताजपुर।
तावडू़ खंड- 11 - गांमडोली, बीजूबास, छज्जूपुर, भूडाका, सूटाका, सेदपुर, खाईका-तावडू, मिलकपुर, जालाका, असीतका और मेंडला।
पुन्हाना खंड-12- खेड़ली-तेड, करहेड़ा-पुन्हाना, अहमदबास-पुन्हाना, कासमपुर, समदखेड़ा, आमका, बेलाका, मिलकपुरी और नकटपुरी, खवाजली खुर्द, जखोकर, कुतबपुर।
फिरोजपुर झिरका खंड:- 2 कुलताजपुर खुर्द और धोली गांव और नगीना खंड में बहादुरी गांव शामिल हैं।
जो गांव आबाद हो चुके हैं-
पुन्हाना खंड के गांव बेलाका में 22 घर 120 जनसंख्या, खेड़ली खुर्द 6 घर 50 जनसंख्या, वाजलीखुर्द में 65 घर 266 जनसंख्या, करहेड़ा-पुन्हाना में 40 घरों की 250 जनसंख्या, कुतकपुर घर 40 जनसंख्या 250, कासमपुर घर 9 जनसंख्या 58 हैं, इसी प्रकार नूंह खंड के गंाव धोेली और नल्हड़ भी आबाद हो चुके हैं।
क्या कहते हैं सदर कानूनगो-
सदर कानूनगो जान मोहम्मद का कहना है कि सरकार ने बेचिराग गांवों की स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। जिन गांवों में आबादी हो चुकी है या फिर वे अभी तक बेचिराग हैं उनकी रिपोर्ट तैयार की जा रही है। जल्द ही रिपोर्ट तैयार करके सरकार को भेज दी जाएगी।