Jitender Singh Shunty, founder of Shaheed Bhagat Singh Seva Dal
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कोरोना संक्रमण से मृत लोगों के शवों को उनके परिवार वालों तक या श्मशान घाट तक पहुंचाना आरिफ खान का काम था। वे बीमार, संक्रमित लोगों को अस्पताल तक पहुंचाने का काम निःशुल्क किया करते थे। वे अब तक सैकड़ों कोरोना संक्रमित लोगों को अस्पताल या श्मशान तक पहुंचा चुके थे। लेकिन आज वे खुद कोरोना का शिकार हो गए। उनके इलाज की पूरी कोशिश की गई, लेकिन डॉक्टर उन्हें नहीं बचा सके।
शहीद भगत सिंह सेवा दल के संचालक जितेंदर सिंह शंटी ने अमर उजाला को बताया कि आरिफ खान 1995 से ही शहीद भगत सिंह सेवा दल का वाहन चला रहे थे। कुछ दिन पहले उन्हें कोरोना संक्रमण होने की आशंका हुई थी। उन्हें जीटीबी अस्पताल ले जाया गया था जहां उनका इलाज किया गया था। शुक्रवार शाम को उनकी तबियत ज्यादा खराब हो गई। उनका ऑक्सीजन स्तर 70 के करीब आ गया था। इसके बाद उन्हें बाड़ा हिंदू राव अस्पताल ले जाया गया। आज शनिवार सुबह उनका देहावसान हो गया।
48 साल के आरिफ खान पूर्वी दिल्ली के वेलकम इलाके में रहते थे। उनके परिवार में पत्नी के अलावा पांच बच्चे हैं। सेवा दल का कहना है कि उनका परिवार किराए के मकान में रहता है और अब परिवार के पास आय का कोई साधन नहीं बचा है। वे अपने स्तर पर परिवार की मदद तो करेंगे ही, दिल्ली सरकार से भी आरिफ खान के परिवार को सहयोग दिलाने का प्रयास करेंगे।