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शिक्षक दिवस: इत्तेफाकन बने गुरुजी, 24 साल से बच्चों को पढ़ा कर पा रहे संतुष्टि, कर चुके हैं अगरबत्ती बेचने से लेकर प्लंबिंग तक का काम

Sat, 04 Sep 2021 06:24 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

संतराम बताते हैं कि उन्होंने अपने शुरूआती दौर में प्लंबर, बस कंडक्टरी, स्क्रीन प्रिंटिंग, साबुन और अगरबत्ती बेचने का काम भी किया है। उन्होंने कभी सोचा नहीं था कि उनकी जिंदगी इतनी बदल जाएगी।
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शिक्षक दिवस - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इत्तेफाकन बने गुरुजी और अब 24 साल से बच्चों को पढ़ाकर संतुष्टि पा रहे हैं। दिल्ली सरकार के सुभाष नगर स्थित सर्वोदय बाल विद्यालय में पढ़ा रहे संत राम ऐसे ही शिक्षक हैं। जो शिक्षक बनने से प्लंबिंग, सेल्समैन, बस में कंडक्टर के साथ-साथ साबुन और अगरबत्ती बेचने का काम भी कर चुके हैं। पत्नि के लिए लाए गए एक फॉर्म ने उनकी पूरी जिंदगी ही बदल दी। अब वह निस्वार्थ भाव से बच्चों को ज्ञान देकर अपना कर्तव्य निभा रहे हैं। 

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दिल्ली के रहने वाले संत राम सुभाष नगर स्थित सर्वोदय बाल विद्यालय में 1997 से बतौर हिंदी शिक्षक के तौर पर पढ़ा रहे हैं। शिक्षक बनने से पहले उनका सफर आसान नहीं था। वह काफी संघर्ष कर इस मुकाम तक पहुंचे हैं। शिक्षक बनकर बच्चों से सम्मान, आदर, प्यार पा रहे हैं।

प्लंबिंग करने से लेकर साबुन तक बेचा
संतराम बताते हैं कि उन्होंने अपने शुरूआती दौर में प्लंबर, बस कंडक्टरी, स्क्रीन प्रिंटिंग, साबुन और अगरबत्ती बेचने का काम भी किया है। उन्होंने कभी सोचा नहीं था कि उनकी जिंदगी इतनी बदल जाएगी। बस आर्थिक परेशानियों के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और आगे बढ़ते हुए शिक्षक बन गए।
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जाकिर हुसैन कॉलेज से की स्नातक की पढ़ाई
संत राम बताते हैं कि जब स्कूल में दसवीं में थे तब ही घर के पास वर्ष 1983 में स्क्रीन प्रिंटिंग का काम शुरू किया। तब उनकी सैलेरी 240 रुपये थी। उसके बाद सेल्समैन का काम किया। साइकिल पर साबुन और अगरबत्ती भी बेची। जाकिर हुसैन कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की। 1989 में उन्हें केलविनेटर कंपनी में स्टोर मैनेजर की नौकरी मिली। उसके बाद नौकरी छूट गई फिर बस में डेढ़ महीने कंडक्टरी की। इस दौरान प्लंबिंग का काम भी किया।

पत्नी के लिए लाए फॉर्म ने बदली जिंदगी
वह बताते हैं कि ऐसे ही जिंदगी आगे बढ़ रही थी कि वह अपनी पत्नी को ऐलिमेंट्री टीचर कोर्स कराने के लिए फॉर्म लेकर आए। लेकिन किसी कारणवश वह फॉर्म नहीं भर सकी। तब उन्होंने फॉर्म भर दिया। उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनका चयन होगा लेकिन उनका चयन राजेंद्र नगर स्थित शिक्षा प्रशिक्षण संस्थान( डाइट) में हो गया। और तब से वह बच्चों को पढ़ा रहे हैं।

गैजेट में रुचि होने के कारण बच्चों को पढ़ाने में भी करते हैं इनका उपयोग
पहले प्राइमरी शिक्षक शादी खामपुर स्थित सर्वोदय कन्या विद्यालय में पढ़ाना शुरू किया। अब वह सुभाष नगर स्थित सर्वोदय बाल विद्यालय में पढ़ा रहे हैं। वह राजकीय विद्यालय शिक्षक संघ के पश्चिमी जोन के जिला सचिव भी हैं। वह स्लम में रह रहे बच्चों के लिए वर्कशॉप और समर कैंप भी लगाते हैं ताकि उन बच्चों के शिक्षा उत्थान का कार्य किया जा सके। चूंकि इलेक्ट्रानिक्स और गैजेट में रुचि रही है लिहाजा प्रयास करते हैं कि इनका प्रयोग बच्चों को पढ़ाने में किया जा सके। 

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