केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के अनुसार शिकायतकर्ता तत्कालीन थलसेना प्रमुख जनरल वीके सिंह ने 30 मार्च और 10 अप्रैल 2012 को पत्र लिखकर शिकायत की थी कि 22 सितम्बर 2010 को उनके कार्यालय में मुलाकात के दौरान तेजिंदर सिंह ने टाट्रा ट्रक सहित 1,676 हाई मोबिलिटी व्हिकल्स (एचएमवी) की खरीद संबंधी फाइल मंजूर करने के एवज में रवि ऋषि नामक व्यक्ति की ओर से 14 करोड़ रुपये घूस की पेशकश की थी। शिकायत के आधार पर प्रारंभिक जांच की गई थी और बाद में सीबीआई ने अक्टूबर 2012 में भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की अधिनियम की धारा 12 के तहत एक प्राथमिकी दर्ज की थी।
तेजिंदर सिंह की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा और प्रमोद कुमार दुबे ने दलील दी कि आरोप तय करने का निचली अदालत का आदेश निर्धारित कानून के विपरीत है, क्योंकि भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 12 के तहत किसी अपराध के पक्ष में कोई आधार नहीं दिया गया था।
सीबीआई के वकील ने इस दलील का पुरजोर विरोध करते हुए कहा कि याचिका में कोई दम नहीं है और निचली अदालत की ओर से पारित आदेश में कोई हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।