सपा संगठन में हर सप्ताह कुछ न कुछ बड़ा बवाल होता रहता है। पार्टी हाईकमान पहले का समाधान नहीं निकालता, इसी दौरान दूसरा विवाद खड़ा हो जाता है। अब जीडीए बोर्ड के दो मेंबर बनाने को लेकर बवाल हो गया है।
रातोंरात दो राज्य मंत्रियों को हटाकर जीडीए के सदस्य बनने वाले नेताओं से पार्टी में रोष है। जीडीए बोर्ड मेंबर में जगह मिलना मलाईदार पद माना जाता है।
इसमें जगह न मिलने से नाराज सपा केपूर्व पदाधिकारी और वरिष्ठ नेता सरफराज अहमद ने इस्तीफा दे दिया है। दो राज्य मंत्री राकेश यादव और रामकिशोर अग्रवाल जीडीए बोर्ड के मेंबर थे।
तीसरे मेंबर पूर्व महानगर अध्यक्ष धर्मवीर डबास हैं। सपा में जीडीए बोर्ड में जगह पाने के लिए मारामारी मची थी, लेकिन तीनों सदस्यों के दमदार होने से किसी का बस नहीं चल रहा था।
मंगलवार को एकाएक दो गुमनाम सपा कार्यकर्ताओं को जीडीए का बोर्ड मेंबर बना दिया गया। राज्यमंत्री राकेश यादव और रामकिशोर अग्रवाल को हटाकर इनके स्थान पर राजन कश्यप और मौ. गफ्फार को जीडीए बोर्ड मेंबर की जिम्मेदारी सौंप दी गई। इन दोनों को सपा केज्यादातर पदाधिकारी नहीं जानते हैं।
सपा में महासचिव और चुनाव प्रभारी रहे सरफराज अहमद ने इसको वरिष्ठ नेताओं का अपमान माना है। उनका कहना है कि कभी पार्टी की बैठक में भी न आने वाले गुमनाम कार्यकर्ताओं को महत्वपूर्ण पदों पर बैठाना हमारी बेइज्जती है।
पार्टी ने 17 साल की सेवा को रातोंरात भुला दिया है। अपने 100 साथियों के साथ सपा को छोड़ दिया है। जल्द ही कई अन्य नेता भी सपा को अलविदा कहेंगे। अपना त्यागपत्र लखनऊ भेज दिया है।
महानगर अध्यक्ष संजय यादव ने कहा कि जीडीए में दोनों सदस्यों का चयन लखनऊ से हुआ है। एक सपा के छात्र नेता है और दूसरे गरीब कार्यकर्ता। इनकेचयन से किसी को नाराजगी नहीं होनी चाहिए। सरफराज अहमद वरिष्ठ नेता हैं। उनको पार्टी नहीं छोड़ने दी जाएगी। वह थोड़े नाराज हैं, मिलकर मना लिया जाएगा।