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फेसबुक, ट्विटर पर लगेगा बैन

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दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी भी सरकारी कार्यालय में लगे कंप्यूटर पर सोशल नेटवर्किंग साइट नहीं खोली जाएगी। मात्र एक कंप्यूटर से इन साइट पर निगरानी रखी जा सकेगी, लेकिन कंप्यूटर पर सरकारी डाटा नहीं डाला जाएगा जिससे रिकार्ड चोरी न हो सके।
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इसके अलावा सभी सरकारी कामकाज के लिए बनाई नई ई-मेल नीति के तहत 50 लाख कर्मचारियों को जल्द से जल्द ई-मेल अकाउंट जारी किए जाएं। कार्यकारी न्यायाधीश बीडी अहमद व न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल की खंडपीठ ने केंद्र सरकार को अमेरिका व चीन का सॉफ्टवेयर इस्तेमाल करने की अपेक्षा अपना अलग से सॉफ्टवेयर बनाने पर विचार करने का भी निर्देश दिया।

अदालत ने कहा कि देश के इंजीनियर बाहर जाकर नए सॉफ्टवेयर बना रहे हैं। ऐसे इंजीनियरों के जरिये भारत स्वयं का सॉफ्टवेयर इस्तेमाल करे, ताकि सरकारी डाटा चोरी होने की संभावना खत्म हो जाए।
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30 अप्रैल है डेडलाइन

इससे पूर्व केंद्र सरकार की और से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल राजीव मेहरा ने खंडपीठ को बताया कि सभी सरकारी कार्यालयों को निर्देश जारी किया गया है कि कोई भी कर्मचारी ऑफिशियल सिस्टम व नेटवर्क पर सोशल नेटवर्किंग साइट का इस्तेमाल नहीं करेगा। वर्तमान में 4.5 लाख सरकारी कर्मचारी आवंटित ऑफिशियल ई-मेल अकाउंट का प्रयोग कर रहे हैं।

वहीं, खंडपीठ ने संबंधित मंत्रालय को निर्देश दिया कि पेश नई ई-मेल पॉलिसी के ड्राफ्ट को बैठक करके अंतिम रूप दें। खंडपीठ ने मामले की सुनवाई 30 अप्रैल तय की है। सूचना एवं टेक्नोलॉजी विभाग ने पेश शपथ पत्र में कहा कि सरकारी कामकाज में अब नई ई-मेल नीति के तहत ही कामकाज होगा।

खंडपीठ केएन गोविंदाचार्य की याचिका पर सुनवाई कर रही है। उनका आरोप है कि सरकार गूगल व जीमेल का इस्तेमाल करने वाले 15 करोड़ इंटरनेट यूजर्स की प्राइवेसी और डाटा सुरक्षा के लिए समुचित कदम नहीं उठा रही है।
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