भाजपा का चुनाव प्रचार पूरी तरह से नरेंद्र मोदी पर केंद्रित हो गया है। आमतौर पर माना जाता था कि दिल्ली में राष्ट्रीय नेताओं की दखल रहती है। सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, लालकृष्ण आडवाणी, राजनाथ समेत कई राष्ट्रीय नेता राजधानी में अहम रोल निभाते रहे हैं, लेकिन अब ये मंच से तो गायब है ही साथ ही होर्डिंग्स से भी नदारद दिखे। पोस्टर पर स्लोगन भी ‘पूरे देश की यही पुकार, अबकी बार मोदी सरकार’ लिखा हुआ है।
हालांकि जब बीजेपी कार्यकर्ताओं की कमी पड़ गई तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं ने मोर्चा संभाल लिया। वहीं भाजपा की ओर से आयोजन स्थल के आसपास की जिम्मेदारी भारतीय जनता युवा मोर्चा के 200 से ज्यादा कार्यकर्ताओं ने संभाली थी। भारतीय जनता युवा मोर्चा दिल्ली प्रदेश के प्रमुख गौरव खारी ने बताया कि पार्टी ने उन्हें आयोजन स्थल के आसपास व्यवस्था बनाए रखने और वहां पहुंचने वालों को सही गेट तक पहुंचाने के लिए निर्देश दिया है।
अनूप जलोटा और मनोज ने रोके दर्शक
दिल्ली में मोदी रैली स्थल पर अपनी टाइमिंग से लेट पहुंचे। हालांकि तब भी युवा दर्शक रैली स्थल से नहीं गए। लेकिन इसकी वजह मोदी की चाहत नहीं बल्कि भोजपुरी स्टार मनोज तिवारी और भजन गायक अनूप जलोटा थे।
उत्तर-पूर्वी दिल्ली से भाजपा के प्रत्याशी मनोज तिवारी ने रैली में जब भोजपुरी में भाषण दिया तो उनके समर्थकों ने जमकर तालियां बजाईं। मनोज तिवारी ने कहा कि लोग उन्हें बाहरी उम्मीदवार बता रहे हैं। उनको जवाब देने के लिए उन्होंने यमुना विहार में घर भी ले लिया है।
भजन गायक अनूप जलोटा ने भी मोदी के समर्थन में जमकर कसीदे पढ़े। वह काफी देर तक दर्शकों को रोके रहे। उन्होंने अपना चर्चित भजन ऐसी लागी लगन, मीरा हो गई मगन भी सुनाया।
पहली बार था इस बात का डर
बुधवार को दिल्ली महज आठ हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था वाले पार्क में भी बीजेपी कुर्सियां खाली रह जाने का डर सता रहा था। ऐसा पहली बाद था जब मोदी की रैली के इतने छोटे पार्क को चुना गया हो। जानकारी के मुताबिक बीजेपी को डर था कि कहीं मोदी की रैली में लोगों की भीड़ कम न पड़ जाए इसिलए ग्राउंड छोटा कर भीड़ ज्यादा दिखाने की रणनीति पहले ही बना ली गई थी।
हालांकि पार्टी के एक पक्ष का कहना है कि राजधानी में जब पहली रैली होनी थी तो रोहिणी स्थिति जापानी पार्क में भव्य तैयारी की गई थी। पिछले दिनों ही रामलीला मैदान में बाबा रामदेव ने मोदी के लिए बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया था। इसलिए जल्दी-जल्दी रैलियां होने के कारण छोट ग्राउंड चुना गया था। हालांकि जिस क्षेत्र में मोदी की रैली थी वहां करीब मतदाताओं की संख्या 37 लाख से भी ज्यादा है। ऐसे में बीजेपी का कुर्सियां खाली रह जाने वाला डर सामने आ गया।