स्मार्ट सिटी की दौड़ से बाहर हुए गाजियाबाद की स्मार्टनेस को बिजली का भी ‘झटका’ लगा। स्मार्ट सिटी प्रपोजल में केंद्र सरकार ने तीन साल के दौरान हुए डेवलपमेंट में बिजली आपूर्ति की डिटेल भी मांगी थी।
केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने पूछा था कि शहर में बिजली की उपलब्धता मांग के अनुरूप है या नहीं और कटौती को खत्म करने के लिए कितने संसाधन जुटाए गए हैं।
इसके पीछे सरकार की मंशा गाजियाबाद के पास अपने बिजली संसाधनों की स्थिति जानना तो था ही यह अंदाजा लगाना भी था कि भविष्य में यहां बिजली के कितने संसाधन जुटाने पड़ेंगे और इसके लिए फंड की व्यवस्था कैसे होगी।
गाजियाबाद की विद्युत व्यवस्था की हालत हर साल गर्मियों में लोगों के सामने आ जाती है। शहर में सिर्फ बिजली की उपलब्धता की कमी ही नहीं हैं, संसाधनों की भी बड़ी कमी हैं।
हालात यह है कि पॉश और जीडीए द्वारा विकसित कालोनियों को छोड़ दें तो बाकी अधिकांश कालोनियों में बिजली के पोल की संख्या भी पूरी नहीं हैं। बिजली की उपलब्धता और सब-स्टेशनों की कमी से 8 से 10 घंटे की कटौती हो जाती है।
सिर पर मंडरा रहे तार
स्मार्ट सिटी की दौड़ में जिन हाईटेक और आर्थिक संपन्न शहरों से गाजियाबाद की प्रतिस्पर्धा रही, बिजली व्यवस्था में उनसे कहीं ज्यादा पीछे है यह शहर। पुणे, सूरत जैसे शहरों में जहां अंडरग्राउंड केबलिंग हैं।
वहीं गाजियाबाद में ओवरहेड तारों को भी व्यवस्थित नहीं किया गया। बिजली के पोल की कमी के चलते बांस-बल्लियों के सहारे लटके तार सिर पर ‘मौत’ बनकर मंडराते रहते हैं।
1400 मेगावाट की मांग
तेजी से बढ़ती आबादी वाले शहर गाजियाबाद में बिजली की मांग भी इतनी ही तेजी से बढ़ रही है। उद्योग, मॉल्स-मल्टीप्लेक्स और दिनों दिन बन रही रेजिडेंशियल सोसायटियों के चलते बीते साल गर्मियों में यहां बिजली की मांग 1500 मेगावाट से ज्यादा पहुंच गई थी।
इसके सापेक्ष सप्लाई सिर्फ 960 मेगावाट प्रतिदिन हो पाई। यानी 515 मेगावाट बिजली की कमी रही। इसके चलते रोजाना 8 से 10 घंटे की कटौती की गई थी।
सब-स्टेशनों की कमी
गाजियाबाद में आबादी के बढ़ने की वजह से ही सब-स्टेशनों की कमी भी बढ़ रही है। गाजियाबाद में फिलहाल 33 केवी के 43 सब-स्टेशन हैं। गाजियाबाद में अभी भी 30 से ज्यादा सब-स्टेशनों की कमी हैं। पावर कारपोरेशन 21 सब-स्टेशनों के निर्माण पर काम कर रहा है।
एक साल में ये तैयार हो जाएंगे। कारपोरेशन के अधिकारियों के मुताबिक ट्रांसमिशन के 14 सब-स्टेशनों की कमी हैं। इन पर भी कारपोरेशन प्लानिंग कर रहा है।