दिल्ली चिड़ियाघर में सफेद बाघ ने एक युवक को मार डाला। इस हादसे के बाद तरह-तरह की बातें सामने आ रही हैं। हादसे में मारे गए युवक मकसूद के बारे में कहा जा रहा है कि वह मानसिक रूप से कमजोर था तो कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि वह आत्महत्या करने के मन से बाघ के बाड़े में कूदा था।
उधर, मकसूद की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद उसकी मौत के कारणों का भी पता चल गया है। इस पूरे मामले में मकसूद के साथ ही चिड़ियाघर के गार्डों की भूमिका सबसे ज्यादा सवालों के घेरे में रही है।
चिड़ियाघर में हुए इस हादसे ने यहां दर्शकों की संख्या घटाई है हालांकि जो भी दर्शक वहां पहुंच रहे हैं वे सफेद बाघ को देखने के लिए ज्यादा उत्सुक नजर आ रहे हैं। पढ़िए, इस हादसे से 7 ऐसे खुलासे जो आपको हैरान कर देंगे।
'कूदने से पहले बाघ को मारा था पत्थर'
बाड़े में कूदने से पहले मकसूद ने सफेद बाघ पर पत्थर फेंका था। वह दो बार पहले बेरिकेड को पार करके बाडे़ की दीवार तक पहुंच गया था। यह कहना है मंगलवार को हादसे वक्त वहां तैनात गार्ड प्रवीण का। प्रवीण ने बताया कि उसने मकसूद को दो बार पकड़कर बाहर किया। दोबारा अंदर जाने से मना भी किया।
प्रवीण ने बताया कि उसी दौरान स्कूली बच्चों का एक समूह आ गया। बच्चों की भीड़ को संभालने के लिए लाइन लगवाने लगा। इसी दौरान मकसूद तीसरी बार पहला बेरिकेड पार करके बाड़े की दीवार के पास पहुंच गया और दीवार पर चढ़कर नीचे कूद गया। प्रवीण के मुताबिक उसने तुरंत इसकी सूचना अधिकारियों तक वायरलेस पर दी।
प्रवीण ने बताया कि मकसूद काफी देर से उसी बाड़े के पास खड़ा था। उसने इस दौरान बाघ पर पत्थर भी फेंका था। समझाने के बाद भी वह नहीं माना और मौका पाते ही दीवार से छलांग लगाकर नीचे कूद पड़ा।
प्रवीण ने कहा कि बाघ काफी दूर था लेकिन उसके कूदते ही वह उसके पास पहुंच गया। तब तक युवक चुपचाप वहां बैठकर उससे बचने की कोशिश करता रहा। लेकिन पांच मिनट के भीतर ही बाघ ने उसे मार दिया।
घंटी बजाने पर बाघ ने युवक को छोड़ा था
जिस समय बाघ ने युवक की गर्दन को पकड़ रखा था, उस समय घंटी बजाकर उसे छुड़ाया गया था। खाना खाने व पिंजड़े में बुलाने के लिए इसी घंटी की आवाज का प्रयोग किया जाता है।
दिल्ली पुलिस जू निदेशक को नोटिस देकर यह जानने की कोशिश करेगी कि सेफ्टी गाइडलाइंस क्या हैं। किस कर्मचारी की कहां ड्यूटी है इसकी भी जानकारी ली जाएगी।
दक्षिण-पूर्व जिले के एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि शुरुआती जांच में ये बात सामने आई है कि बाघ को पिंजड़े के अंदर खाना खाने आदि के लिए बुलाया जाता है तो पिंजड़े की कुंडी को हुक से बजाया जाता है। आवाज सुनते ही बाघ पिंजड़े के अंदर चला जाता है। ये घंटी विशेष तरीके से व अलग हटकर बजाई जाती है।
समय पर आता ट्रेनर तो बच जाती जान
जिस समय बाघ ने मकसूद की गर्दन को पकड़ रखा था और इधर-उधर लेकर घूम रहा था। इस दौरान ट्रेनर शिवलाल मौके पर आया। उसने पिंजडे के अंदर लगी कुंडी को हुक से बजाया। घंटी बजने की आवाज सुनकर बाघ ने युवक को छोड़ दिया और पिंजड़े के अंदर चला गया था।
पुलिस अधिकारी इस बात को मानते हैं कि अगर ट्रेनर समय से मौके पर पहुंच जाता तो शायद युवक की जान बच सकती थी।
गौरतलब है कि मकसूद की मौत को लेकर निजामुद्दीन थाना पुलिस ने लापरवाही से मौत का मामला दर्ज किया है। दक्षिण-पूर्व जिला पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की तफ्तीश शुरू कर दी गई है। पुलिस की क्राइम टीम ने भी मौके का मुआयना किया था। पुलिस सेंट्रल जू अथॉरिटी ऑफ इंडिया की रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।
दम घुटने से हुई मौत, खून भी ज्यादा बहा
दिल्ली चिड़ियाघर में मंगलवार दोपहर को बाघ का शिकार हुए मकसूद का पोस्टमार्टम मंगलवार को एम्स के ट्रॉमा सेंटर में हुआ। पुलिस के अनुसार, पोस्टमार्टम में डॉक्टरों को करीब साढ़े तीन घंटे लगे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने में समय लगेगा, लेकिन शुरुआती जांच में पता चला है कि बाघ ने मकसूद की मौत दम घुटने से हुई है।
बाघ ने उसका मांस नहीं खाया था। डॉक्टरों ने बताया कि युवक के शरीर और गर्दन पर पूरा मांस था। गर्दन पर सिर्फ काटने के निशान थे, लेकिन फटी हुई थी।
अधिक खून का बहना भी मकसूद की मौत का दूसरा कारण बताया जा रहा है। पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी भी करवाई गई है। वहीं, पुलिस ने शाम को शव परिजनों को सौंप दिया है।
जू अथॉरिटी की टीम ने किया दौरा, मांगी रिपोर्ट
बुधवार को केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सेंट्रल जू अथॉरिटी) और वन विभाग के अधिकारियों ने चिड़ियाघर का दौरा किया। प्राधिकरण के चेयरमैन बी. एस. बनोला समेत अन्य अधिकारियों की टीम ने हादसे वाली जगह का मुआयना किया।
उन्होंने हादसे की वजह जानने की कोशिश की। अधिकारियों ने दौरे के बाद चिड़ियाघर निदेशक से पूरी घटना की रिपोर्ट देने को कहा है। दरअसल, इस हादसे के बाद केंद्र सरकार के संबंधित मंत्रालय ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए निदेशक को तलब कर लिया था।
इस संबंध में हादसे की पूरी रिपोर्ट जल्द से जल्द जमा करने के लिए कहा गया है। इसे लेकर जू के अधिकारियों के अलावा चिड़ियाघर प्राधिकरण व वन विभाग के अधिकारियों ने इस संबंध में बुधवार को जू पहुंचे थे।
चिड़ियाघर में जो आए विजय को ढूंढते रहे
चिड़ियाघर में मंगलवार को हुए हादसे के बाद बुधवार को दर्शकों की भीड़ कम रही। मगर जो भीड़ आई भी उन्हें चिड़ियाघर के जानवरों से ज्यादा सफेद बाघ विजय को देखने की ज्यादा उत्सुकता दिखी।
बुधवार को दर्शकों की सबसे ज्यादा भीड़ सफेद बाघ के बाड़े के पास ही नजर आई। सभी सिर्फ बाघ को लेकर ही चर्चा करते दिखे। हालांकि विजय को बुधवार को पिंजरे से बाहर नहीं निकाला गया था।
चिड़ियाघर में बुधवार को 2998 दर्शक घूमने के लिए पहुंचे। मंगलवार को दोपहर तक दर्शकों की संख्या 1580 थी। आम तौर पर चिड़ियाघर में वीक डेज में औसतन 4-5 हजार लोग पहुंचते हैं। वीकेंड में यह संख्या 6 हजार भी पार कर जाती है।
हालांकि चिड़ियाघर प्रशासन का कहना है कि यह संख्या सामान्य है। इसमें कोई खास कमी नहीं आई है। बुधवार को चिड़ियाघर में सबसे ज्यादा भीड़ सफेद बाघ को देखने वालों की थी। हर कोई सफेद बाघ को देखना चाहता था, लेकिन बुधवार को उसे बाहर निकाला ही नहीं गया था। लोगों के लिए सिर्फ सफेद बाघिन रानी को बाहर निकाला गया था, जिसे कई दर्शक विजय ही समझ रहे थे।
पिंजरे में नजरबंद हुआ सफेद बाघ
खुले बाड़े में दर्शकों में रोमांच पैदा करने वाला विजय मंगलवार को हादसे के बाद से ही नजरबंद है। आम दिनों की तरह वह बुधवार को बाड़े के खुले हिस्से में नजर नहीं आया। चिड़ियाघर प्रशासन के मुताबिक हादसे के बाद से उसे पिंजरे में डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है।
बुधवार को विजय को देखने वालों की भीड़ बाड़े के बाहर लगी रही, लेकिन किसी को वह नजर नहीं आया। बुधवार को उसे बाहर नहीं निकाला गया। उसकी जगह सफेद बाघिन रानी ही खुले में नजर आई। चिड़ियाघर प्रशासन के मुताबिक विजय आदमखोर नहीं है कि उसे नजरबंद कर दिया जाए। बस इस हादसे के बाद उस पर नजर रखी जा रही है।
डॉक्टरों की रिपोर्ट के मुताबिक उसकी दिनभर की गतिविधि सामान्य है। उसने समय पर खाना खाया है। उसे रोज की तरह दस किलो मांस खाने के लिए दिया गया था जिसे उसने रोज की तरह सामान्य तरीके से खाया।
चिड़ियाघर के प्रवक्ता रियाज खान ने बताया कि विजय अब सामान्य है, लेकिन अभी तीन-चार दिनों तक उसे और निगरानी में रखेंगे। उन्होंने फिर चिड़ियाघर प्रशासन का बचाव करते हुए कहा कि हमारे पास इतना समय नहीं मिला की हम रेस्क्यू ऑपरेशन चला पाते। भीड़ के शोर व पत्थर मारने की वजह से भी विजय थोड़ा भड़क गया।
'जानते सभी हैं, पर मानता कोई नहीं'
किसी भी जानवर को ना सताएं। उनके ऊपर किसी भी तरह की वस्तु ना फेंकें। चिड़ियाघर में जगह-जगह लगे यह बोर्ड यही बताते हैं लेकिन लोग है कि मानते नहीं। चिड़ियाघर में आने वाले दर्शक खासतौर से युवा जानवरों को एक जगह बैठा देखकर उसे चलाने के लिए उन पर पत्थर फेंकते हैं या फिर शोर मचाते हैं। इससे जानवर कई बार परेशान होकर उग्र हो जाते हैं।
दरअसल चिड़ियाघर में जानवरों को कुछ भी खाने का सामान फेंकने और पत्थर मारने पर पाबंदी है। इसके लिए दो हजार रुपये तक का जुर्माना भी है। बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को प्रवेश के साथ बोर्ड व अनाउंसमेंट से सूचना भी दी जाती है। मगर वह इसे मानते नहीं और मौका मिलते ही पत्थर फेंकना या शोर मचाना शुरू कर देते हैं।
चिड़ियाघर के प्रवक्ता रियाज खान कहते हैं कि हम लोगों की इस आदत से परेशान है। हालांकि बाड़े के बाहर तैनात गार्ड्स की मदद से हम इसे रोकने का प्रयास करते है। मगर भीड़ ज्यादा होने पर हम दिक्कत आती है।