उपराज्यपाल ने इस परियोजना के तहत कृत्रिम बुद्धिमत्ता को शामिल करने के निर्देश दिए हैं। इससे भीड़ नियंत्रण, व्यवहार संबंधी लक्षण और विसंगतियों की पहचान कर कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को तत्काल सूचना मिलने के बाद अपराध रोकने के लिए तत्काल पुलिस थानों से उचित कार्रवाई की जा सकेगी। सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं के लिए सुरक्षा इंतजामों को और पुख्ता बनाने के लिए गृह मंत्रालय एवं महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सहयोग से निर्भया फंड के तहत दिल्ली में सुरक्षित शहर परियोजना को मंजूरी दी थी। परियोजना का उद्देश्य महिलाओं के खिलाफ होने वाले किसी भी तरह के अपराध पर अंकुश लगाना है। इसके लिए तकनीक के जरिये सार्वजनिक स्थालों की 24x7 निगरानी की जाएगी। इससे वास्तविक समय वीडियो, विश्लेषण करने सहित महिलाओं को संकट की स्थिति में आपात कालीन वाहन की भी सुविधा मुहैया की जाएगी। परियोजना (बोली राशि 798 करोड़) के तहत सी-डैक, एनईसी, रेलटेल की सेवाएं मुख्य तौर पर शामिल हैं।
परियोजना का उद्देश्य
. प्रौद्योगिकी के जरिये महिलाओं के लिए पुलिस की शीघ्र उपलब्धता।
. सार्वजनिक स्थानों पर बढ़ी हुई और मौजूदगी, सीसीटीवी कैमरे लगाने सहित महिलाओं के लिए मोबाइल पुलिस वैन (प्रखर)।
. किसी भी तरह की सहायता की जरूरत होने पर त्वरित और प्रभावी आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली।
. महिला अपराध को रोकने के लिए सार्वजनिक क्षेत्रों की 24x7 सीसीटीवी से होगी निगरानी।
. महिला सुरक्षा के लिए स्थान-आधारित सेवाओं का विस्तार, ताकि अपराधियों तक तकनीक के जरिये पहुंचकर अपराध को रोकना।
. वीडियो विश्लेषण के आधार पर अलर्ट, ताकि तत्काल अपराध पर शिकंजा कसने के लिए निवारक उपाय किए जा सकें।
परियोजना में होंगे शामिल
. दिल्ली में 10,582 सीसीटीवी कैमरे
. कमांड एवं कंट्रोल सेंटर की स्थापना
. वीडियो एनालिटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, चेहरे की पहचान के लिए अलग प्रणाली सहित दूसरी प्रणालियों का पुलिस मुख्यालय और थाना में इस्तेमाल
. अलग-अलग डेटा सेट (32 डेटा सेट) और सीसीटीवी का एकीकरण
. दो मोबाइल कमांड और कंट्रोल सेंटर वाहन
. संचार उपकरण से लैस 88 प्रखर वैन
. बॉडी वॉर्न कैमरा, व्हीकल माउंटेड कैमरा, जीपीएस
. सीसीटीवी के एकीकरण के जरिये भविष्य में संबंधित विभागों की भी निगरानी की परियोजनाएं
. सेफ सिटी प्रोजेक्ट के तहत सीसीटीवी कैमरों की जीआईएस मैपिंग होगी