दक्षिणी दिल्ली के फार्महाउस मालिकों को जल्द ही संपत्ति कर न चुकाने पर अर्थ दंड का सामना करना पड़ेगा। एक सर्वे के मुताबिक दक्ष्रिणी दिल्ली नगर निगम में 1900 फार्महाउस हैं जिनमें से 1400 ने संपत्तिकर का भुगतान नहीं किया है।
जांच करने पर पता चला है कि ये फार्महाउस 50 लाख से 3 करोड़ के संपत्ति कर के कर्जदार हैं। इनमें से करीब 1140 फार्महाउस नागरिक समिति के अंतर्गत आते हैं जिन्हें नोटिस जारी किए गए हैं और 100 की नीलामी प्रक्रिया शुरू की है।
यह सर्वे दिल्ली के छतरपुर, घिटोरनी, वेस्टर्न ग्रीन, रजोकरी, महाबलीपुरम ग्रीन्स, असोला, आयानगर, कापासहेड़ा, पुष्पांजली, सोलापुर, भटाल, छौला, डेरामंडी, भ्रट्टी, गदेपुर में किया गया था।
उपायुक्त राम मोहन सिंह का कहना है कि जिन इलाकों में फार्महाउस मालिकों द्वारा निर्माण कराया जा रहा है उन सभी इलाकों में संपत्ति कर की चोरी रोकने के लिए टीमों का गठन किया गया है।
फार्महाउसों से जुड़ी हुई खाली जमीन पर भी संपत्ति कर लागू किया है लेकिन कृषि योग्य भूमि को इसमें शामिल नहीं किया गया है। सर्वे में उस भूमि का पता लगाया गया जिसके बारे में फार्महाउस मालिकों द्वारा कृषि कार्य में उपयोग का झूठा दावा किया गया था। ये जमीनें निवेश के लिए खरीदी गई थीं और ऐसी ही छोड़ दी गईं।
निगम कर्मियों ने बताया कि अगर भूमि का व्यावसायिक उपयोग किया जाएगा तो चार गुना संपत्ति कर वसूला जायेगा और अगर किराए पर लेकर उपयोग किया जाएगा तो दोगुना संपत्ति कर वसूला जाएगा।
इस जमीन की कीमत 5 करोड़ के करीब है। बहुत से फार्महाउस मालिकों द्वारा विशाल आकार के निर्माण कराए जा रहे हैं और उनके रख रखाव पर भारी पैसा खर्च कर रहे हैं लेकिन, संपत्ति कर नहीं दे रहे हैं।
सर्वे के अनुसार 40 से 45 के करीब फार्महाउस राजनायिकों ने किराए पर लिए हैं और मालिकों को आवश्यक राशि से कम पैसा दे रहे हैं। उपायुक्त राम मोहन सिंह ने कहा हमें फार्महाउसों से राजस्व का 6 प्रतिशत के करीब मिलना चाहिए।