वित्त मंत्री अरुण जेटली शुक्रवार को कौशाम्बी के यशोदा अस्पताल के एक्सपेंशन का उद्घाटन करने पहुंचे। यहां पहुंचकर अरुण जेटली बोले पहले लोग सिर्फ सरकारी अस्पतालों पर निर्भर रहते थे। मगर जनसंख्या का अधिक बोझ उठाने में सरकारी अस्पतालों को परशानी होती थी।
20 साल में भारत में चिकित्सा क्षेत्र में क्रांति हुई। अमेरिका की एजेंसी में भी भारतीय डॉक्टर्स है। प्राइवेट अस्पतालों को वजह से भारत मेडिकल टूरिज्म का केंद्र बन रहा है। अभी बहुत कमियां भी हैं।
विकास तो हुआ मगर प्रश्न ये है की जिनके पास साधन नहीं उनका खर्च कौन उठाएगा। जेटली ने बजट में 1/3 वर्ग के लिए एक बीमा पालिसी निकलने की बात भी कही।
उसकी तैयारी की जा रही है। सीनियर सिटिज़न के लिए भी स्वास्थ्य बीमा की योजना बन रही है। देश में हेल्थ केअर बहुत महंगा है। इसलिए पूरे विश्व को एक मॉडल पर चलना होगा। सभी को हेल्थ इन्शुरन्स लेना होगा। अभी सिर्फ 11% लोग ही बीमित हैं। लोगों को बीमा ना करवाने की सोच को बदलना होगा।
उन्होंने डॉक्टर्स की संख्या देश के लिए चिंता है। डॉक्टर्स जितने तैयार होते हैं वह कम हैं। सरकारी अस्पताल भी कम हैं। मेडिकल इंस्टिट्यूट बढ़ाये जाएं। जिन अस्पतालों में मेडिकल कॉलेज नहीं हैं वहां मेडिकल कॉलेज बनाने की छूट दी जाये।
इसका सुझाव दिया गया है। कॉस्ट ऑफ़ मेडिसिन एक और चुनौती है। विकसित देशों में दवाएं बहुत महंगी हैं। मगर यहां बाकि दुनिया की तुलना में मेडिसिन के दाम कम हैं।
अंत में अरुण जेटली ने डॉक्टरों व शोधार्थियों से अपील की कि कोशिश करें कि देश में ज्यादा से ज्यादा दवाएं बने। पेटेंट मिले जिससे कॉस्ट काम रहे। साथ ही दवाओं के दाम न बढ़ें।