जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में नौ फरवरी को अफजल गुरू के कार्यक्रम में देश विरोधी नारे लगाने के मामले की जांच के लिए गठित हाई लेवल कमेटी ने छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार, उमर खालिद, अनिर्बन भट्टाचार्य व दो अन्य छात्रों को बर्खास्त करने की सिफारिश की है।
इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है मगर सूत्रों का कहना है कि सिफारिश हुई है और अंतिम फैसला प्रो. एम जगदीश कुमार और चीफ प्रॉक्टर प्रो. पी आर डिमरी लेंगे।
इसी कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर फिलहाल चीफ प्रॉक्टर ने 21 छात्रों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए 48 घंटे में जवाब देने का निर्देश दिया है।
दोषी पाए जाने पर कार्रवाई का अधिकार चीफ प्रॉक्टर के पास
jnu
- फोटो : अमर उजाला
उधर, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने विश्वविद्यालय को पत्र लिखकर उमर खालिद और अनिर्बन भट्टाचार्य के कमरे की तलाशी लेने के साथ लैपटॉप उपलब्ध करवाने को कहा है।
शुक्रवार को पांच सदस्यीय हाई लेवल कमेटी ने अपनी रिपोर्ट कुलपति प्रो. एम जगदीश कुमार को सौंपी थी। सोमवार को कुलपति ने इसकी सिफारिशों पर डीन कमेटी के साथ चर्चा की।
विश्वविद्यालय के नियमों को तोड़ने वाले छात्रों पर अगली कार्रवाई करने का जिम्मा चीफ प्रॉक्टर को सौंप दिया गया। क्योंकि जेएनयू में छात्रों के दोषी पाए जाने पर कार्रवाई का अधिकार चीफ प्रॉक्टर को होता है।
सिफारिशों का सम्मान करता हूं, गलती पर कार्रवाई करें
JNU
सूत्रों के मुताबिक, चीफ प्रॉक्टर प्रो. डिमरी ने 21 छात्रों को नोटिस जारी किया है, जिसमें अध्यक्ष कन्हैया कुमार, महासचिव रामा नागा, संयुक्त सचिव व एबीवीपी पदाधिकारी सौरभ शर्मा, अंनत प्रकाश, अनिर्बन भट्टाचार्य, सैय्यद उमर खालिद, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष आशुतोष, डीराजा की बेटी अपराजिता राजा आदि के नाम शामिल हैं।
जेएनयू छात्रसंघ के संयुक्त सचिव सौरभ शर्मा का कहना है कि चीफ प्रॉक्टर ने मुझे भी कारण बताओ नोटिस भेजा है, इसकी जानकारी नहीं है। हालांकि यदि कमेटी ने मुझे नियमों को तोड़ने का दोषी माना है तो फिर मैं कार्रवाई के तहत सजा के लिए तैयार हूं।
देश विरोधी घटना पर कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक करते हुए दोषियों को जल्द से जल्द सजा मिलनी चाहिए। हालांकि मैं ही इस घटना को सामने लाया था और विरोध दर्ज किया था।