दिल्ली की करीब दो तिहाई इलाके में बिजली वितरण करने वाली कंपनी बांबे सबअर्बन इलेक्ट्रिक सप्लाई (बीएसईएस) की सहायक कंपनी राजधानी पावर लिमिटेड (बीआरपीएल) और यमुना पावर लिमिटेड (बीवाईपीएल) ने दिल्ली सरकार के अंतर्गत आने वाले दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड के अर्थ गणित को पूरी तरह से बिगाड़ दिया है।
ट्रांसको की आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि कर्मचारियों के वेतन और मरम्मत के काम पर भी असर पड़ रहा है। ट्रांसको के इन दोनों बिजली वितरण कंपनियों पर करीब 2000 करोड़ रुपये का बकाया है।
दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड (डीटीएल) का कहना है कि राजधानी पावर लिमिटेड पर 1170.89 करोड़ और यमुना पावर लिमिटेड पर 787.16 करोड़ रुपये बकाया है। यह बकाया अक्तूबर-2010 से है। ट्रांसको की ओर से कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी दोनों बिजली वितरण कंपनियों की ओर से ट्रांसमिशन शुल्क का भुगतान नहीं किया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने 26 मार्च-2014 को बिजली कंपनियों को आदेश दिया था कि वर्तमान भुगतान करने के आदेश दिए थे। बावजूद भुगतान नहीं किया जा रहा है इसी वजह से कंपनियों के खिलाफ अदालत की अवमानना का मामला भी दर्ज कराया गया है।