वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण का आम आदमी पार्टी (आप) से मोहभंग होने के बाद मुख्यमंत्री और पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल को हाईकोर्ट में विचाराधीन याचिका की पैरवी के लिए अब नया वकील नियुक्त करना पड़ेगा।
केजरीवाल ने हाईकोर्ट को बताया कि वे तय नहीं कर पाए है कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी मानहानि मामले में उन्हें जेल भेजने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को जारी रखा जाए या नहीं।
न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति आशुतोष की खंडपीठ के समक्ष पेश केजरीवाल के अधिवक्ता ने कहा कि अधिवक्ता प्रशांत भूषण अब इस मामले में पेश नहीं होंगे।
अदालत ने दी केजरीवाल को मोहलत
ऐसे में उन्हें इस मुद्दे पर निर्णय लेने के लिए कुछ समय दिया जाए। उन्होंने कहा कि केजरीवाल अभी तय नहीं कर पाए हैं कि याचिका पर सुनवाई जारी रखी जाए या नहीं। इस मामले में उन्हें नए अधिवक्ता का चयन करना है। अदालत ने अब इस मामले में सुनवाई के लिए 26 मई तय की है।
मानहानि के इस मामले में निचली अदालत ने केजरीवाल के खिलाफ समन जारी किए थे। अदालत में पेश होने के बाद केजरीवाल ने जमानती मुचलका भरने से इनकार कर दिया।
इस पर अदालत ने उन्हें जेल भेज दिया था। केजरीवाल ने अपनी हिरासत को गैरकानूनी बताते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मजिस्ट्रेट के फैसले को चुनौती दी थी।
अब क्या होगा केजरीवाल का?
हाईकोर्ट के सुझाव पर बाद में केजरीवाल ने मुचलका भर दिया और उनकी रिहाई हुई थी। केजरीवाल का तर्क है कि अदालत में पेश होने के बाद मुचलका भरना जरूरी नहीं है।
वहीं सुनवाई के दौरान हाल ही में अदालत ने नितिन गडकरी और अरविंद केजरीवाल को मानहानि मामले में सौहार्दपूर्ण वातावरण में समझौता करने का सुझाव दिया था।
सर्वोच्च न्यायालय ने 17 अप्रैल को केजरीवाल की याचिका पर दो मानहानि के मामलों में सुनवाई पर रोक लगा दी थी।