ओवरलोड पावर स्टेशन से ही अफसरों ने बिल्डरों को कनेक्शन दे दिए। इसका खामियाजा महानगर के लाखों उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। बिल्डरों को ये कनेक्शन जीडीए के पावर स्टेशन तैयार होने के बाद जारी किए जाने थे। कनेक्शन जारी करने का क्रम अब भी जारी है। इसकी जांच अब एमडी स्तर से की जाएगी।
महानगर में ऐसे दर्जनों मामले हैं, जहां मानकों को ताक पर रखकर बिल्डरों को कनेक्शन दिए गए। जांच के दायरे में कनावनी और राजनगर एक्सटेंशन के बिल्डरों के कनेक्शन भी हैं। राजनगर एक्सटेंशन में दो पावर स्टेशनों के बराबर लोड के कनेक्शन मानकों को ताक पर रखकर जारी कर दिए गए। पिछले सप्ताह ओवरलोड के चलते केबिल फाल्ट हो गया था, इस कारण लोगों को 17 घंटे बिजली संकट का सामना करना पड़ा था।
यह हुआ
राजनगर एक्सटेंशन में जीडीए को पावर स्टेशनों का निर्माण कराना था। बिल्डरों को अपार्टमेंट-टावर बनाने के लिए पावर कारपोरेशन को अस्थाई कनेक्शन देने थे। इसके बावजूद एक्सटेंशन में 50 से ज्यादा स्थाई कनेक्शन कारपोरेशन अफसरों ने जारी कर दिए। एक्सटेंशन में करीब 200 एमवीए विद्युत लोड के कनेक्शन जारी किए गए।
जीडीए ने खींचे हाथ
बिल्डरों को कनेक्शन मिलने के बाद जीडीए ने यहां बनने वाले चार पावर स्टेशनों से हाथ खींच लिए हैं। इस क्षेत्र में पावर स्टेशनों का निर्माण जीडीए को नवंबर-2011 तक पूरा करना था, जो कि अभी तक शुरू भी नहीं हुआ है, जबकि इस क्षेत्र में भवन निर्माण और कनेक्शन जारी हैं।
यह हो रही परेशान
एक्सटेंशन क्षेत्र को कनेक्शन नंदग्राम-पटेलनगर क्षेत्र से दिए गए हैं। इससे पटेलनगर, नंदग्राम, मेरठ रोड, हरवंशनगर, सेवानगर और धूकना क्षेत्र के उपभोक्ताओं को लो वोल्टेज का सामना करना पड़ रहा है। यहां तार टूटने और ट्रांसफार्मर डैमेज होने की शिकायतें सबसे ज्यादा है। 33 केवीए पावर स्टेशन के भूमिगत केबिल में भी फाल्ट हो चुका है।
एमडी हैं नाराजगी
जांच में सामने आया कि ये पावर स्टेशन ओवरलोड हैं। यहां से बिल्डरों को कनेक्शन दे दिए हैं। इसमें वसूली के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। एमडी ने दो साल में दिए गए सभी कनेक्शनों की जांच एसई एसबी यादव की अध्यक्षता वाली कमेटी से कराने के आदेश दिए हैं।