सांस का रोगी जब कोरोना से ठीक हो जाता है तो यानी कि जब बुखार इत्यादि नहीं रहता है और ऑक्सीजन का स्तर भी ठीक हो जाता है तो उसके बावजूद भी कई बार व्यक्ति के फेफड़े में उतनी ताकत नहीं रहती जितनी पहले थी। फेफड़े की जो जगह नष्ट हुई थी उसे ठीक होने के लिए वहां पर रेशे बनते हैं, जिससे फेफड़े का प्रभावी हिस्सा कम हो जाता है और उसमें फूलने की क्षमता भी कम हो जाती है। इसलिए सांस के रोगियों को ठीक होने के बाद भी छाती और फेफड़ों का व्यायाम करते रहना अत्यंत आवश्यक है।
दिल की बीमारी वाले भी सुरक्षित नहीं
इसी प्रकार हमारे दिल की धमनियों भी प्रभावित हो सकती हैं। दिल की धड़कनों की खांबी या दिल से खून को आगे भेजने की शक्ति कम हो सकती है। ऐसा पुरानी बीमारी में भी देखा गया था। इसलिए ठीक होने के कुछ हफ्तों या महीनों बाद दिल की जांच कराना और यदि कोई कमी हो तो इसका इलाज कराना जरूरी है।
कोरोना के दौरान मांसपेशियां काफी प्रभावित होती हैं और कुछ जोड़ एवं मांसपेशियों में सूजन आ सकती है। करोना से प्रत्यक्ष रूप में ठीक होने के बाद लंबे समय तक तक मांसपेशियों एवं जोड़ों में दर्द रह सकता है। कमजोरी भी महसूस हो सकती है। इसके लिए दर्द की साधारण दवाई जैसे पैरासिटामोल, कैल्शियम , विटामिन डी और फिजियोथैरेपी व्यायाम करते रहे।
कम एंटीबॉटी वाले लोगों को बरतनी है विशेष एहतियात
एम्स के पूर्व डॉक्टर प्रवीण सिंघल बताते हैं कि दिल्ली मे अभी तक कोई मामला नहीं आया है, जिसमें व्यक्ति दोबारा संक्रमित हुआ हो, लेकिन कम एंटीबॉडी वाले लोगों को ज्यादा ख्याल रखने की जरूरत है। क्योंकि, उनके शरीर में पर्याप्त रूप से रोग प्रतिरोधक क्षमता नहीं होती। ऐसे मे उनके दोबारा संक्रमित होने की संभावना भी होती है। अमेरिका मे कुछ ऐसे मामले देखे गए हैं। जहां लोग दोबारा संक्रमित हुए हैं।