खेड़ला गांव का आरिफ ट्रक मिस्त्री है। वो किसी काम से दिल्ली गया हुआ था। उसके तीन बच्चे 10 साल की शबाना, 8 वर्षीय साद और 4 माह का इकरार संदिग्ध परिस्थितियों में घर में बने पानी के टैंक में जा गिरे। परिजनों के मुताबिक, जब बच्चों की मां को पता लगा तो वो उन्हें बचाने के लिए टैंक में कूद गई।
जिले के खेड़ला गांव में तीन बच्चों की घर में बने पानी के टैंक में गिरने से संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। वहीं बच्चों को बचाने के लिए टैंक में कूदी मां की हालत गंभीर है। जो शहीद हसन खान मेवाती मेडिकल कॉलेज में जिंदगी और मौत के बीच में जूझ रही है। इस हादसे से गांव में मातम पसरा हुआ है। खबर लिखे जाने तक पीड़ित परिजनों ने पुलिस को लिखित शिकायत नहीं दी थी, पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। तीनों बच्चों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए सामान्य अस्पताल में भेज दिया गया।
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जानकारी के अनुसार खेड़ला गांव का आरिफ ट्रक मिस्त्री है। वो किसी काम से दिल्ली गया हुआ था। उसके तीन बच्चे 10 साल की शबाना, 8 वर्षीय साद और 4 माह का इकरार संदिग्ध परिस्थितियों में घर में बने पानी के टैंक में जा गिरे। परिजनों के मुताबिक, जब बच्चों की मां को पता लगा तो वो उन्हें बचाने के लिए टैंक में कूद गई। लेकिन तब तक देर को चुकी थी।
पड़ोसी उसकी आवाज सुनकर पानी से निकालने आए, तब तक तीनों बच्चों की मौत हो चुकी थी और महिला को पड़ोसियों ने गंभीर हालत में बाहर निकालकर अस्पताल में भर्ती कराया। इसकी सूचना जैसे ही पुलिस को मिली पुलिस ने मौके पर पहुंच तीनों शवों को कब्जे में लिया। इस मामले के जांच अधिकारी सब इंस्पेक्टर भरत सिंह ने बताया कि बच्चों की मां शकुनत अपने घर पर अपने बच्चों के साथ अकेली थी। उसका एक 12 वर्षीय लड़का शोएब स्कूल में पढ़ने के लिए गया था और उसके तीन बच्चे घर पर ही थे। वो मां सहित पानी के टैंक में कैसे गिरे इसकी जांच की जा रही है।
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पुलिस को अभी कोई शिकायत नहीं मिली है। पुलिस ने तीनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल पहुंचा दिया है। इतना ही नहीं पुलिस का कहना है कि इस मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी। खबर लिखे जाने तक इस मामले में अभी तक किसी भी पक्ष ने पुलिस में शिकायत नहीं दर्ज कराई है।
दिल्ली से आए ट्रक मिस्त्री आरिफ को जैसे ही इस घटना के बारे में पता लगा तो वह फूट-फूटकर रोने लगा। उसने रोते हुए कहा कि मैं अब किसके सहारे रहूंगा। मेरे मासूम चले गए। दूसरे परिजनों का भी रो रो कर बुरा हाल था।