एक करोड़ की ई-सिगरेट के साथ दो तस्कर गिरफ्तार
- आरोपियों के पास से 2480 ई-सिगरेट और चार किलो गांजा बरामद हुआ, सरगना फरार
- पश्चिमी एशियाई देशों से नेपाल के रास्ते लाते थे
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। पश्चिमी एशियाई देशों से इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट (ई-सिगरेट) मंगाकर दिल्ली एनसीआर में सप्लाई करने वाले गिरोह के दो तस्करों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। बृहस्पतिवार को क्राइम रिस्पांस टीम (सीआरटी) और सेक्टर-20 थाने की संयुक्त कार्रवाई में गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मथुरा निवासी रवि कुमार और धनबाद निवासी शहनवाज के रूप में हुआ है। आरोपियों के पास से 2480 ई-सिगरेट की बरामद हुई है। जिसकी कीमत एक करोड़ रुपये आंकी जा रही है। गिरोह का सरगना फरार है।
पुलिस के मुताबिक बृहस्पतिवार शाम को गुरुग्राम से आ रहे ऑटो में भारी संख्या में ई-सिगरेट लाए जाने की सूचना मिली। सीआरटी और सेक्टर-20 टीम ने घेरेबंदी करनी शुरू कर दी। डीएलएफ तिराहे के पास से दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस पूछताछ में दोनों आरोपियों ने बताया कि गुरुग्राम निवासी सरगना जितेंद्र वालिया उर्फ केडी उर्फ सोनू उन्हें माल सप्लाई करने के लिए देता था। आरोपी दिल्ली एनसीआर के स्कूल, कालेजों, यूनिवर्सिटी व पीजी में रहकर छात्र-छात्राओं को फुटकर में बेचते थे। बिक्री से मिलने वाले रकम तीनों मिलकर बांट लेते थे।
आरोपी चार से पांच हजार रुपये में ई-सिगरेट बेचते थे। आरोपियों के पास से चार किलो गांजा भी बरामद हुआ है। आरोपी गांजे का नशा बढ़ाने के लिए उसमें केमिकल मिलाते थे। इस कारण से इसकी बाजार में कीमत ज्यादा होती थी। पुलिस गिरोह के मुख्य सरगना की तलाश में जुटी है। डीसीपी क्राइम शक्ति मोहन अवस्थी के मुताबिक उसे गिरफ्तार करने के लिए दो टीमें गठित की गईं हैं। गिरफ्त में आए दोनों आरोपी इंटर पास हैं। दोनों का आपराधिक इतिहास नहीं मिला है। लेकिन सरगना के खिलाफ पूर्व में कई मामले दिल्ली में भी दर्ज हुए हैं।
पांच माह में करीब 2 करोड़ की ई-सिगरेट बरामद
नोएडा में पांच माह में करीब 2 करोड़ की ई-सिगरेट तस्करों से बरामद की गई है। देश में प्रतिबंधित ई-सिगरेट नेपाल के रास्ते एनसीआर तक लाई जाती है।वहीं नवंबर 2023 से अबतक पुलिस की टीमों ने जनपद के अलग-अलग हिस्से से आरोपियों के पास से 1593 किलो गांजा बरामद किया है। इसके अलावा 14.67 किलो स्मैक और 26 किलो एमडीएमए ड्रग्स बरामद किया है। इन सबकी कीमत करीब 155 करोड़ है। इस दौरान नशिले पदार्थ की तस्करी में 389 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
टेलीग्राम और व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर करते थे सप्लाई
पुलस पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि ई-सिगरेट के ज्यादातर सप्लाई छात्रों को की जाती थी। पीजी, कॉलेज और स्कूलों के पास सप्लायर के एजेंट होते है। जो छात्रों से संपर्क करते हैं। एजेंट व्हाट्सएप और टेलीग्राम पर ग्रुप बनाकर नए कस्टमर को जोड़ते थे। मांग आने पर एजेंट सप्लायर को जानकारी देता था। जहां से ई-सिगरेट, मादक पदार्थ, रिफिल दिए गए पते पर पहुंचाया जाता था। गिरोह का सरगना भी दोनों ग्रुप से जुड़ा था।