नोएडा। सुप्रीम कोर्ट द्वारा एमराल्ड कोर्ट ट्विन टावर के ध्वस्तीकरण के लिए दी गई समयसीमा मंगलवार को समाप्त हो रही है। अब बिल्डर और प्राधिकरण के बीच एजेंसी चयन और कार्ययोजना सौंपे जाने को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। प्राधिकरण अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में पूरा ठीकरा बिल्डर कंपनी पर फोड़ा है। वहीं, बिल्डर का कहना है कि उन्होंने प्राधिकरण को तीन एजेंसियों के नाम सौंपे थे। साथ ही एक कंसलटेंट की रिपोर्ट भी सौंपी जा चुकी है। अब प्राधिकरण की तकनीकी टीम को एजेंसी तय करनी है। उधर, तीसरा पक्ष एमराल्ड कोर्ट आरडब्ल्यूए अभी ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति में है। एक सप्ताह तक इस प्रकरण में कुछ नहीं हुआ तो तीसरा पक्ष सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल करेगा।
सेक्टर-93 ए सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट में बने अवैध ट्विन टावर को लेकर 31 अगस्त को आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सोमवार को प्राधिकरण ने अनुपालन रिपोर्ट भेजी। अधिकारियों ने बताया कि रिपोर्ट को प्राधिकरण के लीगल सेल ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर दिया होगा। इस रिपोर्ट में प्राधिकरण ने कोर्ट का आदेश आने के बाद आरोपी अधिकारियों के निलंबन, एसआईटी जांच, विजिलेंस में एफआईआर, जिला न्यायालय में परिवाद दायर किया जाना व विभागीय जांच शुरू होने की जानकारी दी है। प्राधिकरण ने यह भी बताया कि ट्विन टावर के ध्वस्तीकरण को लेकर अब तक क्या प्रयास किए गए हैं।
इसमें बताया गया है कि रुड़की स्थित सेेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीबीआरआई) से संपर्क कर टीम बुलाई गई। कई बैठकें प्राधिकरण द्वारा कराई गईं। बिल्डर से पत्राचार किया गया। बिल्डर को एजेंसियों से टावर तोड़ने की कार्ययोजना प्रस्तुत करने के लिए कहा गया। इसके बावजूद बिल्डर कार्ययोजना ही नहीं दे पाया। बिल्डर हर बार समय ही मांगता रहा। वहीं, बिल्डर आरके अरोड़ा का कहना है कि हमने अपना काम पूरा किया है। प्राधिकरण की तकनीकी कमेटी को एजेंसी का चयन करना है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू प्रिटीशन भी डाला है।
अवमानना याचिका की तैयारी
एमराल्ड कोर्ट आरडब्ल्यूए पदाधिकारी उदयभान तेवतिया का कहना है कि टावर ध्वस्तीकरण के लिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पहले ही दिन स्वागत किया था। अवैध निर्माण करने वालों के लिए यह सही फैसला है। आदेश के बावजूद निर्धारित समय में टावर को ध्वस्त नहीं किया जा सका है। एक सप्ताह तक अग्रिम कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। कोई कार्रवाई नहीं होती है तो सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की जाएगी।