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ग्रीन और प्रदूषण मुक्त एयरपोर्ट के लिए उठाए जाएंगे प्रभावी कदम

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ग्रेटर नोएडा। जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को प्रदूषण मुक्त बनाने की योजना है। योजना को सफल बनाने के लिए मास्टर प्लान के तहत ऊर्जा, ईंधन, कचरे और जल प्रबंधन के उचित समावेश जैसे प्रभावी कदम उठाए जाएंगे। एयरपोर्ट के डिजाइन, निर्माण और संचालन के दौरान इसकी बेहतर झलक भी देखने को मिलेगी। मास्टर प्लान के मुताबिक, इसके लिए सतत योजना (ससटेनेबल प्लानिंग) के तहत काम किया जाएगा। इसमें कई तकनीक और प्रक्रियाओं का प्रयोग किया जाएगा। प्रमुख तकनीक में ईंधन के कम से कम उत्सर्जन के अलावा सोलर सिस्टम के ज्यादा से ज्यादा प्रयोग को अपनाया जाएगा। कूड़ा निस्तारण व रिसाइकिलिंग के अलावा वेस्ट-वाटर रिसाइकिलिंग पर भी पूरा जोर दिया जाएगा। पर्यावरण प्रबंधन को अपनाते हुए इस लक्ष्य को पूरा करने की बात कही जा रही है।
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मास्टर प्लान में जरूरी संसाधनों के प्रयोग पर बल दिया गया है। इसकी मदद से ग्रीन एयरपोर्ट का सपना पूरा किया जाएगा। वहीं, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने 8 हेक्टेयर जमीन में एक फारेस्ट पार्क विकसित करने की योजना बनाई है। इसमें प्रोजेक्ट साइट के पेड़ों को यहां शिफ्ट किया जाएगा। इससे यहां आने वाले लोगों को राहत मिलेगी और एयरपोर्ट के प्रदूषण मुक्त होने की राह आसान हो सकेगी। इसके अलावा सभी स्थानीय जीव-जंतुओं के संरक्षण को लेकर भी योजना बनाई गई है, ताकि इनको किसी प्रकार की क्षति न पहुंचे। पूरी तरह से ग्रीन एयरपोर्ट के लिए परिसर के आसपास बिजली चलित वाहनों के लिए संसाधन भी जुटाए जाएंगे।
मॉडल टाउनशिप में शुरू होने से पहले ही सीवर लाइन लीक
जिला प्रशासन ने नोएडा एयरपोर्ट से प्रभावित तीन हजार किसान परिवारों को जेवर बांगर स्थित मॉडल टाउनशिप में विस्थापित तो कर दिया है, लेकिन यहां एक बाद एक समस्या से परेशानी हो रही है। टाउनशिप में जल निकासी के लिए डाली गई सीवर लाइन शुरू होने से पहले ही लीक हो गई। इससे मकानों की नींव में पानी जमा हो रहा है। ऐसे में किसानों को मकानों के कमजोर होने का डर सता रहा है। किसानों का आरोप है कि टाउनशिप में शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छ पेयजल के अलावा पार्क एवं बिजली की भी उचित व्यवस्था नहीं हो पाई है।
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एयरपोर्ट से प्रभावित रोही, नगला फूलखां, नगला गनेशी, नगला छीतर, दयानतपुर खेड़ा, नगला शरीफ व किशोरपुर सहित सात गांव के किसान परिवारों को जेवर बांगर में यमुना विकास प्राधिकरण द्वारा विकसित कराई गई टाउनशिप में विस्थापित किया गया है। टाउनशिप में प्राधिकरण प्लाटों का आवंटन करने के बाद जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा पाया है। किसानों का आरोप है कि जो सुविधाएं दी गई हैं, उनसे भी परेशानी हो रही है। सीवर लाइन लीक कर रही है। यीडा से बार-बार शिकायत के बाद भी कोई अधिकारी किसानों की सुनने को तैयार नहीं है।
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