नोएडा। सुप्रीम कोर्ट ने एक जमीन के मालिक को ब्याज सहित मुआवजा देने का आदेश नोएडा प्राधिकरण को दिया है। मामले में मुआवजे की गणना बाकी है, लेकिन प्राधिकरण के सूत्रों का कहना है कि इसमें करीब 400 करोड़ तक मुआवजा देना पड़ सकता है। हालांकि, प्राधिकरण फिर से सुप्रीम कोर्ट में मामले की अपील करेगा।
सूत्रों का कहना है कि जिस रेड्डी वीराना को मुआवजा देने का आदेश कोर्ट ने दिया है। वह कर्नाटक से हैं और बताया जा रहा है कि वे बिल्डर हैं। उन्होेंने जमीन ली थी, लेकिन पहचान तक प्राधिकरण नहीं कर पा रहा है। इस मामले में वीराना ने जमीन नहीं मांगी, बल्कि मुआवजे के लिए क्लेम किया है। खसरा नंबर के हिसाब से जमीन सेक्टर-18 की है। संभव है कि यह डीएलएफ मॉल के आसपास हो या मॉल की जमीन में भी यह हो सकती है। दरअसल, छलेरा बांगर में वीराना ने दो भूखंड खरीदे थे, जो 2.18 बीघा (करीब 7400 वर्गमीटर) थे। जमीन लेने के बाद प्राधिकरण से विवाद हो गया। प्राधिकरण जमीन को अपनी बता रहा था, वीराना हक जता रहे थे। इसेे लेकर मामला निचली अदालत, जिला कोर्ट, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक गया। आखिर में सुप्रीम कोर्ट ने 1.10 लाख रुपये प्रति वर्गमीटर के तौर पर मुआवजा देने का आदेश दिया है। खास बात यह है कि इसके हिसाब से 82 करोड़ का मुआवजा बनता है, लेकिन कई मदों में इतना भारी भरकम ब्याज लगाया गया है कि इससे मुआवजे की राशि 400 करोड़ तक जा सकती है।