त्यागराज स्टेडियम में विदेश से ट्रेनिंग ले चुके शिक्षकों से सीएम से किया संवादकहा, आलोचक भी मानते है शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। त्यागराज स्टेडियम में रविवार को फिनलैंड, सिंगापुर और कैंब्रिज से ट्रेनिंग ले चुके सरकारी स्कूलों के शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों से संवाद के मौके पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली की शिक्षा क्रांति की वजह से टेंट वाले स्कूल अब टैलेंट वाले बन गए हैं। शानदार इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ शिक्षकों की ट्रेनिंग से स्कूल में माहौल बदला और नतीजे अच्छे आने लगे। आलोचक भी मानते हैं कि दिल्ली के शिक्षा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव हुआ है। सरकार पहले चाहती थी कि प्राइवेट स्कूल से बेहतर सरकारी स्कूल बने, वो बन गए। अब सोच है कि विश्व के स्कूलों से बेहतर बने। पंजाब में भी शिक्षा क्रांति पहुंच गई है। हर विधानसभा क्षेत्र में एक ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ चालू हो रहे हैं और शिक्षकों का पहला दल सिंगापुर ट्रेनिंग के लिए जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहली बार सरकारी स्कूलों के शिक्षकों और प्रिंसिपल को विदेशों में ट्रेनिंग दिलवाने की कोशिश की जा रही है। यह योजना आजादी के बाद ही बनी होती तो अभी तक देश से गरीबी दूर हो गई होती। भारत तभी आगे बढ़ेगा, जब हम बच्चों को अच्छी शिक्षा देंगे।
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एलजी शिक्षकों का अनुभव सुनते तो उन्हें भी गर्व होता
मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर एलजी भी शिक्षकों के अनुभवों को सुनते तो उन्हें भी गर्व होता। उन्हें शिक्षकों के अनुभवों की वीडियो भेजूंगा। उम्मीद है कि इसके बाद वो फिनलैंड की फाइल नहीं रोकेंगे। देश में सामंती सोच चली आ रही कि सरकारी स्कूलों में गरीब बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षकों को ट्रेनिंग के लिए विदेश भेजने की क्या जरूरत है? अगर भाजपा-कांग्रेस शासित राज्य का कोई मुख्यमंत्री कहे कि हमें भी सीखाओ, तो दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया को कुछ दिन के लिए उधार में दे दूंगा। हमारे देश में एक प्रवृत्ति है कि कोई अच्छा काम करे, तो उसको लोग रोकते हैं, यह अच्छी बात नहीं है, इससे देश आगे नहीं बढ़ेगा।
शिक्षकों का बढ़ाया उत्साह
शिक्षकों का उत्साहवर्धन करते हुए सीएम ने कहा कि दिल्ली में जब सरकार बनी तो जज्बा था कि गरीबों के बच्चों को अच्छी शिक्षा देंगे। इसी जज्बे से देश-विदेश की ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में शिक्षकों को भेजना शुरू किया। लीडर वो होता है, जो जबरदस्ती नहीं करता है, वो अपने आचरण और शब्दों से सारे लोगों को प्रेरित करता है। प्रिंसिपल ने अपने आपको लीडर समझना चालू कर दिया, तो जाहिर तौर पर आपने एक बहुत बड़ी क्रांति के लिए उस स्कूल के सारे बच्चों और टीचर्स को प्रेरित करना चालू कर दिया। जब आप विदेश में जाकर स्टीफन हॉकिंग का कॉलेज देखा, तो आपके मन में यह इच्छा पैदा होनी चाहिए कि मैं वापस जाकर अपने देश के अंदर 10 स्टीफन हॉकिंग पैदा करूंगा।
मकसद है शिक्षक विदेश जाए मुख्यमंत्री नहीं
मुख्यमंत्री बने 8 साल हो गए हैं। इन 8 सालों में मात्र दो बार विदेश गया हूं। एक बार जब मदर टेरेसा का निधन हुआ तब इटली गया था। दूसरी बार साउथ कोरिया। मकसद है कि शिक्षक विदेश जाएं, मुख्यमंत्री के विदेश जाने क्या होगा? जबकि पांच साल में नेता पूरी दुनिया का चक्कर लगा आते हैं। स्कूल की बिल्डिंग अच्छी बना लेते, टीचर्स को विदेश घूमा लाते, लेकिन नतीजे अच्छे नहीं आते, तब कहा जाता कि केजरीवाल पैसे बर्बाद कर रहा है। 75 साल में कहीं किसी राज्य में 99.7 फीसदी नतीजे नहीं आए हैं।
अब पंजाब में शिक्षा क्रांति
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली के बाद अब ये शिक्षा क्रांति पंजाब में भी पहुंच गई है। पंजाब में ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ चालू हो रहे हैं। 36 शिक्षकों का पहला जत्था सिंगापुर जा रहा है। म्मीद है कि अगले पांच साल में पंजाब के सारे स्कूल बदल जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली के सरकारी स्कूलों के अभी तक करीब 1400 टीचर्स और प्रिंसिपल विदेशों में ट्रेनिंग करने के लिए जा चुके हैं।सबसे अच्छी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट कैंब्रिज, सिंगापुर, फिनलैंड में ट्रेनिंग के लिए भेजा। इसके अलावा आईआईएम में भी ट्रेनिंग कराई गई है।
बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए देश-विदेश में ट्रेनिंग कराते रहेंगे : सिसोदिया
उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि शिक्षकों को राष्ट्रीय स्तर पर भी आईआईएम में शानदार ट्रेनिंग दिलवाई। पिछले सात साल में दिल्ली सरकार ने अपने स्कूल प्रमुखों को प्रोफेशनल डेवलपमेंट के लिए सात अगल-अगल ट्रेनिंग की व्यवस्था की। हॉवर्ड तक का सफर तय किया है और इसे आगे भी इसे जारी रखेंगे। ट्रेनिंग देने से उनका आत्मविश्वास बढ़ता है, जिससे वो बच्चो के भविष्य के बारे में सही निर्णय ले पाते हैं।
विदेश जाकर ट्रेनिंग ले चुके शिक्षकों ने साझा किए अनुभव
शिक्षक डॉ. राजपाल सिंह ने कहा कि कैंब्रिज दौरे के दौरान पहली बार ब्लेंडेड एप्रोच ऑफ लर्निंग के बारे में पता चला। लॉकडाउन में बच्चों के लिए ऑनलाइन क्लास रूम पूरी तरह से तैयार था, जबकि उस दौरान किसी भी स्कूल ने ऑनलाइन कक्षाएं शुरू नहीं की थी। सिंगापुर से ट्रेनिंग लिए शिक्षक मुरारी झा ने कहा कि अब लगता है कि कुछ नहीं बने तो टीचर्स बन गए वाली सोच बदल रही है। ज्योत्सना ने बताया कि मुझे 2018 में कैंब्रिज स्कूल जाने का मौका मिला। मुझे सबसे अच्छी बात यह लगी कि ये बहुत बाल केंद्रित है। हमारे यहां यह होता है कि अगर बच्चा स्कूल नहीं आ रहा है, तो हम वाइल कार्ड जारी कर देते हैं। अब उसके घर जाकर पूछते है कि बच्चा क्यों नहीं स्कूल जा रहा है। ये बदलाव हमारे स्कूल में आया। असिस्टेंट प्रो. दीपिका मल्होत्रा ने फिनलैंड का अनुभव सांझा किया। कहा वहां दो चीजें ‘छात्र स्वायत्तता और ऑनरशिप’ मुझे सबसे अच्छी लगीं। इसके अलावा आशा, ब्रिजेश कुमार, अवधेश झा, ममता सलूजा समेत कई शिक्षकों ने अपने अनुभव सांझे किए।
कहा क्या सीखा शिक्षकों ने
1. फिनलैंड
फिनलैंड में कुल 59 स्कूलों के प्रमुख और एससीईआरटी के शिक्षक ट्रेनिंग के लिए गए थे। यह टीचर्स फिनलैंड की जैवस्काइला विश्वविद्यालय में ट्रेनिंग लिए।
2. सिंगापुर
सरकारी स्कूलों के 939 मेंटर टीचर्स और टीडीसी को ट्रेनिंग पर भेजा। ये टीचर्स सिंगापुर के एनआईई में ट्रेनिंग लिए। यहां टीचर्स को जॉब के बजाय पेशे के रूप में देखना, मजबूत छात्र शिक्षक संबंधों का विकास करना, रिजल्ट में सुधार के लिए शिक्षण में नवीन पद्धतियों को शामिल करना, व्यक्तिगत सीखने के लिए प्रेरणा और सलाह देना सिखाया गया।
3. कैंब्रिज
सरकारी स्कूलों के 411 प्रमुखों को यूके के कैंब्रिज में ट्रेनिंग के लिए भेजा गया था। इस स्कूल प्रमुखों को जज बिजनेस स्कूल में ट्रेनिंग दी गई। यहां पर स्कूलों के प्रमुखों को टीचर्स को प्रभावी लीडर बनाना, शिक्षा प्रणाली, पाठ्यक्रम संरचना और स्कूलों में अनुभव साझा करने पर ब्रीफिंग, शिक्षा प्रणाली पर लोकल लीडर्स के साथ कक्षाओं के अवलोकन किया।