नगीना। पाकिस्तानी क्रिकेटर हसन अली को मीडिया में शिया बताने वालों को उनके हिंदुस्तानी ससुर लियाकत अली खान ने करारा जवाब दिया है। अमर उजाला से खास बातचीत में पूर्व बीडीपीओ लियाकत अली चंदेनी ने कहा कि मेरे दामाद हसन अली सुन्नी मुसलमान हैं। वो सुन्नी देवबंदी तबलीगी मसलक से ताल्लुक रखते हैं।
उनका कहना है कि हमारा परिवार भी सुन्नी देवबंदी तबलीगी मसलक का मुसलमान है और मैंने अपनी बेटी सामिया आरजू की शादी क्रिकेटर एवं सुन्नी मुसलमान हसन अली के साथ अगस्त 2019 में मुस्लिम रीति रिवाज से की थी। इससे पहले भी मेरे परिवार की दो लड़कियों की शादी क्रिकेटर हसन अली के खानदान में हुई थीं। यह तो पारिवारिक रिश्ते हैं जो बरसों से चले आ रहे हैं। जिला नूंह के गांव चंदेनी निवासी पूर्व खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी लियाकत अली ने बताया कि पाकिस्तानी रेलवे बोर्ड के पूर्व चेयरमैन एवं सांसद सरदार तुफैल खान और उनके दादा सगे भाई थे। उन्हीं की रजामंदी से फ्लाइट इंजीनियर सामिया आरजू और क्रिकेटर हसन अली का रिश्ता तय हुआ था। असामाजिक तत्वों पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि खेल में हार जीत होती रहती है। कोई भी खिलाड़ी जानबूझकर न तो कैच छोड़ता है न ही अपनी तरफ से कोई कमी करता है। यह तो कहने की बातें हैं कि कैच नहीं छूटता तो मैच बदल जाता। अगर 19वें ओवर में लगातार 3 छक्के नहीं लगते तो शायद मैच का परिणाम कुछ और होता। इसका मतलब यह तो नहीं कि हम किसी एक खिलाड़ी को हार के लिए जिम्मेदार ठहराए। मेरी बेटी के पसंदीदा क्रिकेटर विराट कोहली है।