नूंह। जिले के किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। कृषि विभाग के अनुसार, जिले के 70 हजार में से अब तक 8720 किसानों यानी 15 फीसदी लोगों ने ही अपनी फसलों का बीमा कराया है। हालांकि, किसान मंगलवार तक बीमा करा सकते हैं। जिले के 80 फीसदी लोग कृषि पर निर्भर है। ऐसे में फसल बीमा योजना के तहत कम संख्या में किसानों द्वारा फसल का बीमा कराना चिंता का विषय है। जबकि, सरकार और प्रशासन द्वारा जिले में इसके लिए जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं।
हाल ही में बारिश से कपास और बाजरा की फसल को नुकसान हुआ है। इस संबंध में कृषि विभाग में जिले के 261 किसानों ने शिकायत दर्ज कराई है। इनमें नूंह और इंडरी खंड की 80 फीसदी शिकायतें है, जबकि 20 फीसदी नगीना, पुन्हाना, पिनगवां, झिरका और तावडू खंड से हैं।
कृषि विभाग के एसडीओ डॉ. अजीत सिंह ने बताया कि बारिश से फसलों को हुए नुकसान का जायजा अधिकारी ले रहे हैं। बरसात या प्राकृतिक आपदा से फसलों में नुकसान के 72 घंटे के अंदर किसानों को शिकायतें देनी होती हैं। इसके बाद 15 दिनों में खंड कृषि अधिकारी फसलों का निरीक्षण करते हैं। नुकसान के आंकलन के बाद रिपोर्ट बीमा कंपनी को दी जाती है। इसके बाद किसानों को बीमा का लाभ मिल जाता है। खरीफ की कपास और बाजरा की फसल को बीमा कंपनी द्वारा कवर किया जाता है। जबकि, इससे धान की फसल को बाहर रखा गया है। एसडीओ डॉ. अजीत सिंह ने बताया कि धान की फसल में नुकसान का आंकलन औसतन पैदावार के माध्यम से लगाया जाता है। (संवाद)
बीमा की धनराशि नहीं मिली
नूंह खंड के गांव खेड़ला निवासी किसान हाजी अली मोहम्मद, किरा निवासी समय सिंह और छपेड़ा निवासी सुरेंद्र सिंह ने बताया कि उन्होंने पहले कई बार फसलों का बीमा कराया है, लेकिन कंपनी द्वारा उन्हें बीमा की धनराशि नहीं दी गई। इस कारण अब बीमा नहीं कराते हैं।
क्या कहते हैं कृषि अधिकारी
कृषि विभाग के एसडीओ डॉ. अजीत सिंह ने बताया कि जिले के 70 हजार किसानों में से मात्र 8720 किसानों ने ही बीमा कराया है, जोकि 15 फीसदी है। इसका मुख्य कारण 70 फीसदी किसान क्रेडिट कार्ड का लाभ ले चुके हैं, लेकिन धनराशि जमा नहीं करने के कारण बैंकों द्वारा डिफाल्टर होना भी है। 8720 किसानों का रिकार्ड बैंकों में सही है, जोकि बीमा कराए हैं। किसानों को कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ मिले, इसके लिए जागरूक भी किया जा रहा है।