एडीसीपी रणविजय सिंह ने बताया कि दोनों युवक-युवती नोएडा में रियल स्टेट कंपनी अर्थ इंफ्रास्ट्रक्चर में काम करते थे। कोरोना काल में दोनों की नौकरी चली गई तो फर्जी लोन लेने लगे। रियल स्टेट कंपनी में फ्लैट की बुकिंग के दौरान आने वाले दस्तावेज से आधार कार्ड निकाले और पेंट एप से उस पर अपने फोटो लगाकर मॉल्स में जाने लगे। यहां पर 40 से 80 हजार रुपये तक का लोन कराकर सामान खरीदते और फिर उसे बेचकर पैसे कमा लेते थे।
ढाई लाख रुपये तक की कर चुके धोखाधड़ी
उन्होंने बताया कि अब तक दोनों ढाई लाख रुपये से अधिक की धोखाधड़ी कर चुके हैं। आरोपी बजाज फाइनेंस कंपनी से ही लोन कराते थे तो कुछ दिन पहले जब कई लोन की किस्त टूटी और एक ही फोटो आधार कार्ड पर कंपनी ने देखा तो संदेह हुआ। इसके बाद प्रत्येक लोन लेने वाले व्यक्ति पर नजर रखनी शुरू कर दी।
क्रोमा और रिलायंस स्टोर से ही लेते थे लोन
पिछले सप्ताह एक नए लोन के लिए आवेदन हुआ तो इत्तफाक से उसी युवक का फोटो आधार पर मिला जिसकी बजाज फाइनेंस कंपनी को तलाश थी। इसकी सूचना पुलिस को मिली तो एसीपी रजनीश वर्मा और इंस्पेक्टर ज्ञान सिंह को मौके पर भेजा गया। इसके बाद दोनों आरोपियों को लॉजिक्स मॉल से गिरफ्तार कर लिया गया। पेंट एप पर ताहिर आधार व पैन कार्ड बदलने में माहिर है और माला गर्ग परिवार की सदस्य बनकर जाती थी, ताकि कोई संदेह न कर सके। दोनों मॉल्स में क्रोमा और रिलायंस स्टोर से ही लोन लेते थे।