गैर के परों से उड़ सकते हो हद से हद दीवारों तक, अपने पंखों से उड़ जाओगे सात समंदर पारों तक। यह लाइनें सेक्टर-61 मार्वेल होम्स निवासी गीताली चंदा पर सटीक बैठती हैं। शरीर थोड़ा मोटा होने के कारण कई लोगों ने उन पर कमेंट भी किए, लेकिन गीताली ने कभी इन पर ध्यान नहीं दिया और उसे ईश्वर की देन मानकर सफलता की सीढ़ी तक पहुंचीं।
अधिक वजन होने पर लोगों ने गीताली को हतोत्साहित किया, उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। इन सब लड़ाई को लड़ कर अपने सपनों को हासिल किया और कई सौंदर्य प्रतियोगिताएं जीतीं। अपने जैसी महिलाओं के लिए गीताली का कहना है कि वह खुद से प्यार करें, उन्हें सम्मान तभी मिलेगा। उन्होंने कहा कि महिलाएं अपने सपनों को महत्व दें, तभी दुनिया आपको महत्व देगी।
नौकरी, बच्चे और घर के काम के साथ साकार किया सपना
गीताली ने बताया कि इसी सप्ताह गोवा में फिल्मफेयर मिडिल ईस्ट की ओर से आयोजित ग्लैमन मिसेज इंडिया में हिस्सा लिया। इस प्रतियोगिताएं में वह उपविजेता रहीं। इसमें देश से 55 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था। उनका कहना है कि एक कामकाजी महिला की चुनौतियों और एक ही समय में परिवार की देखभाल को देखते हुए यह उपलब्धि पाना आसान नहीं थी। इंसान अपने बुद्धि, धैर्य और लगन से बहुत कुछ कर सकता है। अब वह लोगों की प्रेरणा स्रोत बन गई हैं।
फाइनल राउंड के जवाब ने सबका मन मोहा
फाइनल राउंड में उनसे सवाल पूछा गया था कि एक औरत का रुतबा या अहमियत क्या है। इस पर उन्होंने कहा कि एक औरत ममता है, प्यार है, धीरज है, दुर्गा का स्वरूप है और काली का क्रोध है। औरत अपने आप में एक सृष्टि है। टैलेंट राउंड में चाइल्ड एब्यूज के परफॉर्मेंस में उन्होंने बेस्ट टैलेंट का सबटाइटल हासिल किया।