हथीन। मिड-डे मील (एमडीएम) की रकम अब स्कूल के खाते में नहीं आएगी। जिस दुकान अथवा वेंडर से सामान खरीदा जाएगा, सीधे उसके खाते में एमडीएम की रकम डाली जाएगी। इसके लिए शिक्षा विभाग प्रत्येक स्कूल से दुकानदार अथवा वेंडर की डिटेल मांग रहा है। एमडीएम की इस नई व्यवस्था पर अध्यापक खुल कर तो नहीं बोल रहे हैं परंतु दबे स्वर में आपत्ति जता रहे हैं। शिक्षण स्टाफ का कहना है कि व्यवस्था बनाने में जहां परेशानियां झेलनी पड़ेंगी, वहीं विभाग खुद ही ऐसी दुकानों को चिह्नित करे, जहां से टीचर्स एमडीएम का सामान खरीद सकें। यह जिम्मेदारी स्कूल टीचर्स पर नहीं डाली जाए।
अहम है कि नए सत्र में शिक्षा विभाग ने मिड-डे मील के सभी खातों को शून्य कर बंद कर दिया गया था। इससे पहले एमडीएम का रुपया इन खातों में आता था और यहीं से टीचर्स इसका इस्तेमाल सब्जियां, दाल, दूध आदि खरीदने में करते थे। अब यह व्यवस्था पूरी तरह से खत्म कर दी गई है। अब जिला मौलिक शिक्षा कार्यालय से स्कूलों में लेटर भेजा गया है। इसके साथ एक फॉर्म भी लगाया है, जिसके आधार पर दुकानदार अथवा वेंडर का विवरण भरकर विभाग को देना होगा। जिससे एमडीएम के तहत इनसे हुई खरीद की रकम उनके खातों में डाली जा सके। इसके तहत बिल का विवरण, बिल नंबर, बिल डेट, फर्म का नाम, खाता नंबर, आइएफएससी कोड, बिल की राशि सहित स्कूल का विवरण भी मांगा गया है।
इस बारे में शिक्षण स्टाफ का कहना है कि यह व्यवस्था परेशानी भरी है। सारी जिम्मेदारी शिक्षकों व स्कूलों पर डाल दी गई है। बेहतर होगा कि शिक्षा विभाग अपने स्तर पर दुकानदार अथवा वेंडर को चिह्नित करे, जहां से स्कूल एमडीएम का सामान खरीद सके। इस बारे में जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी गौतम कुमार का कहना है कि मिड-डे मील के लिए जो खरीद होगी वह सीधे फर्म के खाते में जाएगी। इसके लिए फर्म के खाता नंबर सहित अन्य डिटेल मांग की गई है ताकि उनके खातों में रकम जमा करवाई जा सके।