नोएडा। रियल एस्टेट डेवलपर कंपनी ओमेक्स पर आयकर विभाग का शिकंजा कसता जा रहा है। लगातार तीसरे दिन दिल्ली-एनसीआर के करीब 20 ठिकानों पर दस्तावेज खंगाले गए। बुधवार देर शाम तक 25.5 करोड़ रुपये जब्त कर लिए गए थे। करीब 500 करोड़ रुपये के बेहिसाब लेन-देन के दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं। एक-दो परिसरों को छोड़कर सभी जगह देर रात तक जांच की कार्रवाई पूरी हो चुकी थी।
आयकर विभाग की चंडीगढ़ अन्वेषण टीम के नेतृत्व में दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा, गाजियाबाद, चंडीगढ़, लखनऊ, इंदौर सहित हरियाणा और पंजाब के अलग-अलग हिस्सों में करीब 45 ठिकानों पर सोमवार सुबह एक साथ छापे मारे गए थे। दिल्ली के कालकाजी स्थित कंपनी के कारपोरेट ऑफिस से सबसे ज्यादा करीब 12.5 करोड़, कंपनी के एक अधिकारी के दिल्ली स्थित आवास से तीन करोड़, लखनऊ से करीब दो करोड़ रुपये बरामद हुए थे। इसके अलावा अन्य जगह से भी नकदी बरामद की गई थी। बुधवार तक 25 परिसरों की जांच पूरी कर ली गई है।
वहीं, ग्रेटर नोएडा के जेपी ग्रीन सोसाइटी निवासी कंपनी के एक अधिकारी के आवास सहित सेक्टर-93 में भी एक अन्य जगह जांच पूरी हो गई है। आयकर विभाग के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार किसी बिल्डर कंपनी पर अब तक की यह सबसे बड़ी कार्रवाई बताई जा रही है। इसमें करीब 300 आयकर कर्मियों की मदद ली गई। दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद सहित कई शहरों से आयकर विभाग के कर्मचारियों की टीमें बनाकर एक साथ छापे मारे गए।
सर्वर रूम से मिले अहम दस्तावेज
सूत्रों के अनुसार, दिल्ली के कारपोरेट ऑफिस के पीछे एक सर्वर रूम से कई अहम दस्तावेज टीम को मिले हैं। इसमें बेहिसाब लेनदेन का ब्योरा भी मिला है। यह सर्वर रूम गोपनीय था। जांच के दौरान एक के बाद एक कड़ी जुड़ती गई और जांच टीम सर्वर रूम तक पहुंच गई।
चंडीगढ़ के अधिकारियों ने डाला डेरा
बिल्डर समूह पर हुई इस पूरी कार्रवाई का नेतृत्व चंडीगढ़ के आयकर निदेशक (अन्वेषण) आनंद झा ने किया। दिल्ली-एनसीआर में चली कार्रवाई पर नजर रखने के लिए चंडीगढ़ से तीन अधिकारियों ने दिल्ली और गुरुग्राम में डेरा डाला हुआ है। चंडीगढ़ अन्वेषण शाखा के अतिरिक्त निदेशक अंकुर आल्या, संयुक्त निदेशक अश्विन और उप निदेशक ज्योतिंद्र बाजवा दिनभर पूरे एनसीआर के घटनाक्रम का अपडेट लेते रहे।