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आयुष डॉक्टरों द्वारा जारी मेडिकल सर्टिफिकेट स्वीकार न करने पर जवाब तलब

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नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने आयुष डॉक्टरों द्वारा जारी मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट को आनलाइन ड्राइविंग लाइसेंस के नवीनीकरण या उसके पंजीयन के लिए स्वीकार नहीं किए जाने पर केंद्र और दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है। भारतीय चिकित्सा पद्धति जैसे यूनानी, आयुर्वेद व सिद्धा (आयुष) आदि के डॉक्टरों ने इसके खिलाफ याचिका दायर की है। न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने दोनों सरकारों के वकीलों से कहा कि वह इस संबंध में अपने संबंधित अधिकारियों से बात कर अगली सुनवाई 3 सितंबर को सूचित करें।
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याचिकाकर्ता ने कहा है कि फरवरी तक भारतीय चिकित्सा पद्धति के डॉक्टरों का मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट स्वीकार किया जाता था, लेकिन मार्च से उसके ऑनलाइन पंजीकरण किए जाने पर पोर्टल सारथी पर लोगों का भारतीय चिकित्सा पद्धति से प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों का मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं। जबकि ऑफलाइन इन्हें स्वीकार किया जा रहा है। इसलिए सरकार को ऑनलाइन व्यवस्था में सुधार करने को कहा जाए।
ऑनलाइन सर्टिफिकेट को स्वीकार किए जाने की मांग करते हुए एसोसिएशन ऑफआयुर्वेद एंड यूनानी प्रैक्टिशनर इंटीग्रेटेड मेडिकल प्रैक्टिशनर (एवाईयूएस) ने याचिका दाखिल की है। उनकी वकील तान्या अग्रवाल ने कोर्ट से कहा कि परिवहन विभाग अपने सारथी पोर्टल पर पहले भारतीय चिकित्सा पद्धति से प्रेक्टिस करने वाले डॉक्टरों का मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट स्वीकार करता था, लेकिन मार्च से उसे बंद कर दिया है।
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उन्होंने कहा कि अब यह पोर्टल सिर्फ एमबीबीएस डॉक्टरों के जारी मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट को स्वीकार कर रहा है। जबकि भारतीय चिकित्सा पद्धति से प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों को भी मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने का अधिकार है और उनकी भी मान्यता एमबीबीएस डॉक्टरों की तरह ही है। इसलिए सरकार से पोर्टल में सुधार कर भारतीय चिकित्सा पद्धति से प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों के जारी मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट को भी स्वीकार करने का निर्देश दिया जाए।
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