नोएडा। मुआवजा, आबादी और 10 फीसदी आवासीय भूखंड समेत 10 सूत्री मांगों को लेकर मंगलवार को हरौला बरात घर से किसानों ने प्राधिकरण पर हल्ला बोल दिया। किसान पुलिस के बेरिकेड तोड़ते हुए राशन-पानी लेकर प्राधिकरण कार्यालय पर पहुंच गए और अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। किसानों ने चेतावनी दी कि जब तक उनकी समस्याएं दूर नहीं होंगी तो प्राधिकरण में काम भी नहीं होने दिया जाएगा। बुधवार को प्राधिकरण में अधिकारियों को घुसने नहीं दिया जाएगा। हर रोज अलग-अलग गांवों के किसान रात में धरना स्थल पर ठहरेंगे।
किसान नेता सुखवीर खलीफा ने कहा कि 76 दिन से किसान हरौला बरात घर पर धरना दे रहे थे, लेकिन अधिकारियों ने किसानों के बीच जाकर समस्याओं को नहीं सुना। किसानों का जब सब्र टूट गया तो उन्होंने प्राधिकरण कार्यालय पर धरना देने की घोषणा की। मंगलवार को भारी संख्या में किसानों ने प्राधिकरण पर पहुंचकर ताकत दिखा दी है।बुधवार से प्राधिकरण में किसानों का ही काम होगा। यदि किसानों की समस्याएं दूर नहीं की जाएंगी तो प्राधिकरण में किसी का भी काम नहीं होने दिया जाएगा। किसान प्राधिकरण पर ताला लगाएंगे और अधिकारियों को प्रवेश नहीं करने देंगे। यदि फिर भी अधिकारी आए तो आगे क्या स्थिति होगी इसकी जिम्मेदारी उनकी नहीं, बल्कि अधिकारियों की होगी।
अफसर कई घंटे तक फंसे रहे, श्रमिक संगठनों ने दिया समर्थन
कई गेट पर किसानों के कब्जा करने से प्राधिकरण के अंदर काम कर रहे अधिकारी बंधक बन गए। साथ ही, अपने काम कराने के लिए कार्यालय में गए लोग भी दो घंटे के बाद ही दूसरे रास्तों से निकल पाए। वहीं, श्रमिक नेता गंगेश्वर दत्त शर्मा और भरत डेंजर संगठन के साथियों संग किसानों को समर्थन देने पहुंचे। वहीं, सपा और कांग्रेस नेताओं द्वारा भी किसानों को समर्थन दिया गया।
भीड़ देखकर अफसरों ने बदला रास्ता
किसानों का हुजूम दोपहर करीब दो बजे प्राधिकरण कार्यालय पर पहुंचा। किसानों ने कार्यालय के बाहर सड़क पर ही खूंटे गाड़कर टेंट लगाना शुरू कर दिया जबकि प्राधिकरण और पुलिस अधिकारी मौजूद रहे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं कर पाए। किसानों की भीड़ को देखकर अधिकारियों को आने-जाने का रास्ता भी बदलना पड़ा। अधिकारियों ने अपने लिए पीछे की ओर वाले उस रास्ते को खुलवाया, जो ज्यादातर बंद ही रहता था।
सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न करने के केस की तैयारी
पुलिस के अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि किसानों ने प्राधिकरण अधिकारियों को रोकने या कानून को हाथ में लेने का प्रयास किया तो कठोर कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों को कार्यालय में प्रवेश करने से रोकने का मतलब सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाना है। कानून व्यवस्था को बिगड़ने नहीं दिया जाएगा। शांतिपूर्वक आंदोलन किया जा सकता है।
गांव-गांव को दी गई जिम्मेदारी
कुछ गांवों के किसान दिन में धरना देंगे जबकि दूसरे दो से तीन गांवों के किसान प्राधिकरण पर रात में धरना देंगे। किसानों के लिए धरनास्थल पर ही खानपान की व्यवस्था की जा रही है। हर गांव का शेड्यूल बना दिया गया है। किसान अपने समय पर आकर आंदोलन में अपनी भूमिका अदा करेंगे।