पुन्हाना। सरसों की बिजाई का सीजन खत्म हो चुका है और दिवाली के बाद से ही गेहूं की बिजाई तेजी से जारी है लेकिन अभी तक नूंह जिले के हजारों किसानों को पर्याप्त डीएपी खाद न मिलने से किसानों में सरकार के खिलाफ भारी रोष है। आज भी किसानों को खाद की पर्ची कटवाने के लिए थानों में लाइनों में लगना पड़ रहा है। जिले के किसानों ने सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द उन्हें डीएपी खाद उपलब्ध कराई जाए जिससे वह समय पर गेहूं की बिजाई कर सकें। जिले में अभी तक मात्र 75,720 डीएपी के कट्टे पहुंचे हैं जबकि जिले में तीन लाख से भी अधिक डीएपी खाद के कट्टों की जरूरत है। अगर ऐसे ही धीमी गति से चलता रहा तो किसानों को बिना डीएपी खाद के ही अपने गेहूं को खेतों में बिजाई करनी पड़ सकती है, जिससे किसानों को गेहूं की पैदावार में भारी कमी आने का खतरा नजर आ रहा है।
किसान उमर मोहम्मद, जमशेद, मकसूद, सफी मोहम्मद और हाजी मूसा का कहना है कि मेवात एक कृषि प्रधान जिला है यहां के 90 फीसदी लोग कृषि और पशुपालन पर निर्भर रहते है। उनका कहना है कि अगर वे गेहूं और सरसों की बिजाई बिना डीएपी खाद के करते है तो उनके एक एकड़ खेत मे 20 मन से ज्यादा अनाज नहीं बैठा अगर डीएसपी और यूरिया खाद के साथ बिजाई और सिंचाई कर समय इस्तेमाल करते है तो एक एकड़ में 50 से 60 मन तक गेहूं की पैदावार हो जाती है। इसलिए जिले के किसान मजबूर होकर गेहूं की बिजाई में डीएपी खाद का इस्तेमाल करते है। किसानों ने सरकार से मांग की है कि उन्हें जल्द से जल्द खाद उपलब्ध कराई जाए जिससे वे समय पर गेहूं की बिजाई कर सके। किसानों का कहना है कि खाद में काला बाजारी चल रही है। असल किसानों को पर्याप्त खाद ही नही मिल रहा है। आज भी किसानों की सुबह से ही खाद के कट्टे की पर्ची कटवाने के लिए थाना या एसडीएम कार्यालयों में लाइनों के लगना पड़ता है।
अधिकारियों ने माना तीन लाख कट्टों की है जरूरत
कृषि विभाग के भूमि परीक्षण अधिकारी तोमर सिंह ने बताया कि जिले में अब तक 3786 एमटी यानी 75,720 डीएपी खाद के कट्टे आ चुके है जबकि पूरी जिले के किसानों को करीब तीन लाख कट्टों की जरूरत है। उन्होंने कहा सरकार से खाद की डिमांड भेजी गई है जल्द और खाद मिलने वाली है। किसानों को गेहूं की बिजाई के समय खत्म होने से पहले पहले खाद उपलब्ध करा दी जाएगी।