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सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगा विधायक महेंद्र भाटी का परिवार

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महेंद्र सिंह भाटी का फाइल फोटो। - फोटो : Grnoida
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ग्रेटर नोएडा (राजेश भाटी)। दादरी से तीन बार विधायक रहे महेंद्र सिंह भाटी की हत्या के मामले में नैनीताल हाईकोर्ट से बाहुबली नेता डीपी यादव के बरी होने के खिलाफ पीड़ित परिवार सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगा। इसके लिए महेंद्र भाटी का परिवार सीबीआई के अधिकारियों से संपर्क में है।
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दादरी में 13 सितंबर 1992 को विधायक महेंद्र सिंह भाटी कार में सवार होकर नोएडा जाने के लिए निकले थे। इस दौरान उनके साथ गनर महेंद्र सिंह कौशिक और कार चालक देवेंद्र थे। वह थोड़ा आगे चले तो दोस्त उदय आर्य उनके साथ कार में रेलवे रोड तिराहे से बैठ गया। जैसे ही मारुति-800 कार दादरी की रेलवे क्रासिंग पर पहुंची तो पहले से मौजूद आधा दर्जन हमलावरों ने एके-47 से अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं। कार में सवार महेंद्र सिंह भाटी और उदय आर्य की गोलियां लगने से मौत हो गई थी। हत्याकांड में डीपी यादव, दादरी निवासी भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष प्रणीत भाटी, करण यादव और पाला सिंह को आरोपी बनाया गया था।
विधायक की हत्या का मामला सीबीआई कोर्ट में चला था। सीबीआई कोर्ट ने 2015 में डीपी यादव को दोषी मानकर उम्रकैद की सजा सुनाई थी। उन्हें देहरादून जेल में रखा गया था। इधर, सीबीआई कोर्ट के फैसले के खिलाफ आरोपी पक्ष हाईकोर्ट चला गया था। मामले की सुनवाई नैनीताल हाईकोर्ट में हुई। इसमें कोर्ट ने डीपी यादव को स्वास्थ्य संबंधी कारणों से तीन बार कुछ समय के लिए पैरोल दी थी। फिलहाल, डीपी यादव अंतरिम जमानत पर हैं। अन्य आरोपियों की सजा पर अभी निर्णय नहीं आया है। संवाद
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आरोपी करण यादव को मिली थी शार्ट टर्म बेल
पिछले माह नैनीताल हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा काट रहे करण यादव को एक माह की शॉर्ट टर्म बेल दी गई थी। करण ने पत्नी का स्वास्थ्य ठीक न होने के कारण इलाज के लिए कुछ समय के लिए बेल के लिए आवेदन किया था।
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महेंद्र सिंह भाटी की हत्या में डीपी यादव को नैनीताल हाईकोर्ट ने बरी किया है। मामले को लेकर हम सीबीआई के अधिकारियों से मिलकर सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे।
- समीर भाटी, विधायक महेंद्र सिंह भाटी का बेटा
स्थानीय युवाओं के रोजगार के लिए महेंद्र ने किया था संघर्ष
दादरी तहसील के ग्राम मकोड़ा निवासी महेंद्र सिंह भाटी जनता दल से तीन बार विधायक रहे थे। उन्होंने विधायक रहते हुए स्थानीय युवकों को रोजगार के लिए संघर्ष किया था। नोएडा की कंपनियों में युवाओं को रोजगार के लिए उन्होंने आंदोलन चलाए थे। उनके समय में बिना स्थानीय युवकों को रोजगार दिए कंपनियों को चलने नहीं दिया जाता था। उन्होंने हजारों युवाओं को कार बनाने वाले कंपनी डीसीएम समेत कई विख्यात कंपनियों में रोजगार दिलाया था। कई बार उनके समर्थकों और पुलिस का आमना सामना भी हुआ था। नोएडा के सलारपुर थाने को उनके समर्थकों ने आग भी लगा दी थी।
महेंद्र जैसा रुतबा कोई गुर्जर नेता हासिल नहीं कर पाया
विधायक महेंद्र सिंह भाटी की हत्या के बाद गुर्जर राजनीति पूरी तरह राजेश पायलट के इर्दगिर्द घूमने लगी थी। वर्ष 2000 में राजेश पायलट की सड़क हादसे में मौत हो गई थी। इसके बाद कई गुर्जर नेताओं ने चुनाव लड़े, लेकिन सांसद व विधायक बनने के बावजूद कोई भी महेंद्र जैसा रुतबा हासिल नहीं कर पाया। बेटे समीर भाटी ने सबसे पहले 1993 में जनता दल के टिकट पर दादरी से चुनाव लड़ा और जीत गए। फिर 1996 में सपा, 2002 में निर्दलीय और 2007 में रालोद की टिकट पर चुनाव लड़े, लेकिन हार गए। 2012 में कांग्रेस की टिकट पर लड़े, लेकिन तीसरे नंबर पर रहे। वहीं, दादरी से बसपा से सतवीर गुर्जर दो बार विधायक रहे। भाजपा से नवाब सिंह नागर भी विधायक रहे और मंत्री भी बने। दादरी से करतार सिंह नागर भी मंत्री बने। वर्तमान में तेजपाल नागर विधायक हैं। गुर्जर जब भी विभिन्न मुद्दों को लेकर आंदोलन करते हैं तो महेंद्र सिंह भाटी को याद करते हैं।
कभी दोस्त रहे थे महेंद्र व डीपी यादव
दादरी तहसील के गांव मकोड़ा निवासी महेंद्र ने आगरा के सेंट जैन्स में शिक्षा हासिल कर गाजियाबाद में वकालत की थी। उस दौरान उन्होंने राजनीतिक यात्रा कांग्रेस से शुरू की थी। उस दौरान महेंद्र की डीपी यादव से दोस्ती हो गई थी। डीपी यादव उन्हें राजनीतिक गुरु मानने लगे थे। महेंद्र ने 1988 में डीपी यादव को बिसरख ब्लॉक का प्रमुख बनवा दिया। 1989 में करीबी नरेंद्र भाटी को सिकंदराबाद और डीपी यादव को बुलंदशहर से विधायक का टिकट दिलवाया। वे खुद दादरी विधानसभा से चुनाव लड़ रहे थे। क्षेत्र में दो लाख मतदाता थे, जिसमें से एक लाख मतदाता अकेले गुर्जर बिरादरी के थे।
बुलंदशहर चुनाव को लेकर शुरू हुआ विवाद
1991 के विधानसभा चुनाव में महेंद्र सिंह भाटी ने बुलंदशहर से डीपी यादव के सामने पतवाड़ी गांव के प्रकाश पहलवान को जनता दल के टिकट पर चुनाव लड़वाया था। इस चुनाव में जमकर गोलीबारी हुई थी। दोनों तरफ से छह-सात लोग मारे गए थे। डीपी यादव चुनाव हारते-हारते बचे थे। यहीं से दुश्मनी और बढ़ गई थी।
पुलिस के अनुसार, अप्रैल, 1991 में महेंद्र के छोटे भाई राजवीर सिंह भाटी की दादरी रेलवे रोड पर हत्या कर दी गई थी। इसमें महेंद्र फौजी और डीपी यादव के साले परमानंद यादव का नाम सामने आया। इनके खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। इसके बाद दोनों गुटों में गैंगवार होने लगी। डीपी यादव के कई करीबियों की हत्या हुई। इसमें सतवीर गुर्जर भी था। फरवरी 1992 को गाजियाबाद के भाजपा जिलाध्यक्ष प्रवीण भाटी की बरौला में सड़क हादसे में मौत हो गई थी। दो ट्रकों के बीच टक्कर से प्रवीण के मरने पर परिजनों को शक था कि महेंद्र ने हादसे का रूप देकर हत्या कराई है। इस कारण परिवार के लोग डीपी यादव से मिल गए।
हत्या की आशंका थी, महेंद्र ने विधानसभा में उठाया था मुद्दा
महेंद्र को अपने खिलाफ चल रही साजिश का पता चल गया था। उन्होंने जून 1992 में विधानसभा सत्र में लिखित सवाल करते हुए कहा था कि राजनीतिक कारणों से उनकी हत्या हो सकती है। पुलिस, प्रशासन उन्हें सुरक्षा मुहैया नहीं करा रहा है। सुरक्षा नहीं मिली तो अगले सत्र में मेरी शोकसभा होगी। इसके बाद भी कल्याण सिंह सरकार ने उन्हें सुरक्षा मुहैया नहीं कराई थी। तीन माह बाद उनकी हत्या हो गई।
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