ग्रेटर नोएडा। नॉलेज पार्क-5 में बनने वाले प्रदेश के सबसे बडे़ योट्टा डाटा सेंटर पार्क के दो भवनों का निर्माण जनवरी में शुरू होगा। ये डाटा सेंटर दो साल के भीतर ग्राहकों की सेवा के लिए तैयार हो जाएंगे। इससे पहले जनवरी 2021 में शुरू हुए एक भवन का निर्माण जुलाई 2022 में पूरा कर दिया जाएगा। डाटा सेंटर में सात हजार करोड़ का निवेश होगा और हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा। ये डाटा सेंटर 30 मेगावाट आईटी क्षमता का होगा। इसका निर्माण मुंबई का हीरा नंदानी समूह करेगा। योट्टा इंफ्रास्ट्रक्चर ने घोषणा की कि जनवरी 2022 में ग्रेटर नोएडा डाटा सेंटर पार्क में दो और भवनों का निर्माण शुरू करेगी। प्रत्येक में 30 मेगावाट आईटी लोड की क्षमता होगी। ये जनवरी 2024 में ग्राहकों की सेवा के लिए तैयार होंगे। पहली इमारत जुलाई 2022 तक ग्राहक सेवा के लिए 18 महीने से कम समय में तैयार हो जाएगी। प्रदेश सरकार ने अक्तूबर 2020 में कंपनी को 20 एकड़ का डाटा सेंटर पार्क स्थापित करने की मंजूरी दी थी। यह क्षेत्र का पहला डेटा सेंटर पार्क होगा। इसमें छह इंटर कनेक्टेड डाटा सेंटर भवन होंगे।
30 हजार रैक की होगी क्षमता
डाटा सेंटर 250 मेगावाट से अधिक बिजली से संचालित होगा। इसमें 30 हजार रैक की क्षमता होगी। यह परियोजना प्रदेश में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार भी पैदा करेगी। कंपनी केंद्रों के संचालन और निर्माण के लिए टीम का विस्तार तेजी से कर रही है। हीरा नंदानी ग्रुप के सीईओ दर्शन हीरानंदानी ने कहा कि डिजिटल इंडिया उपक्रम ने व्यवसायों के लिए नए रास्ते खोल दिए हैं। भारत कोरोना के आने से बहुत पहले से ही डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की तरफ बढ़ रहा है। योट्टा इन्फ्रास्ट्रक्चर के सह संस्थापक और सीईओ सुनील गुप्ता ने कहा कि डाटा सेंटर पार्क ग्राहकों के लिए सौ फीसदी हरित ऊर्जा के विकल्प के साथ निरर्थक 220 केवी एक्सप्रेस फीडर और एक ऑनसाइट सबस्टेशन द्वारा संचालित होगा।
सोशल मीडिया से लेकर जन सुविधाओं का डाटा रहेगा सुरक्षित
डाटा सेंटर पार्क में फेसबुक, इंस्टाग्राम, यू-ट्यूब आदि के साथ आधार कार्ड, स्वास्थ्य, बैंकिंग, व्यापार, पर्यटन से जुड़ा डाटा भी सुरक्षित रखा जाएगा। भारत सरकार की इज आफ डूइंग बिजनेस योजना के अंतर्गत वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश का देश में 12वां स्थान था। वर्तमान में प्रदेश दूसरे स्थान पर हैं। अभी पर्याप्त डाटा सेंटर नहीं होने के कारण उत्तर प्रदेश समेत देश के तमाम हिस्सों से डाटा विदेशों में रखा जाता है। डाटा सेंटर पार्क बनने के बाद कंपनियां और सरकार देश में ही अपना डाटा सुरक्षित रख सकेंगी।