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कृषि और श्रमिकों के हित में सर छोटू राम के योगदान को भुला नहीं सकते: नायडू

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गुरुग्राम। उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने किसानों की सराहना करते कहा कि कोविड महामारी के दौरान भी उन्होंने अपनी अथक मेहनत से रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन कर देश का सिर ऊंचा रखा। इसके साथ ही उन्होंने ग्रामीण अर्थव्यवस्था के प्रति एकीकृत दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया ताकि किसानों की आय की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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उपराष्ट्रपति ने कहा, हमारा उद्देश्य ग्रामीण समाज का समग्र कल्याण होना चाहिए। कृषि और श्रमिकों के हित में सर छोटू राम के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने छोटू राम को अविभाजित पंजाब में प्रमुख कृषि सुधार लाने का श्रेय देते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाना उनके जैसे क्रांतिकारी दूरदर्शी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने कहा, हमें अपने पिछले अनुभवों को आधार बनाते हुए कृषि और ग्रामीण विकास की रणनीति का नियमित रूप से नवीनीकरण करना होगा। इसके साथ ही देश को आत्मनिर्भर बनाने के हमारे प्रयासों में नई तकनीकों को शामिल करना होगा।
नायडू ने कृषि को देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए कहा कि जब तक गांव अविकसित रहेंगे देश का विकास नहीं हो सकता। उन्होंने कहा स्वतंत्रता आंदोलन महज राजनीतिक आंदोलन नहीं था बल्कि सामाजिक और आर्थिक सुधार का एजेंडा भी था। सर छोटू राम किसान के बेटे थे और किसानों की समस्याओं की उन्हें गहरी समझ थी। उन्होंने सामाजिक और शिक्षा क्षेत्र में सुधार के उनके कदमों की प्रशंसा की। नायडू ने कहा, आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए युवा पीढ़ी को सर छोटू राम, पंडित दीनदयाल उपाध्याय, राममनोहर लोहिया, औैर चौधरी चरण सिंह जैसे महान नेताओं के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए।
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सर छोटूराम के कामकाज का संकलन जरूरी
नायडू ने कहा सर छोटूराम के जीवन से युवा पीढ़ी को प्रेरणा लेनी चाहिए। मेरा मानना है कि देश में बहुत से ऐसी महान विभूतियां हुई हैं, जिनके बारे में लोगों को ज्यादा पता नहीं चल पाया है। स्वाधीनता आंदोलन के अनेक ऐसे नायक थे, जिन्होंने अपने क्षेत्र या समुदाय में काम किया लेकिन इतिहास में उन्हें वह स्थान नहीं मिल सका, जिसके वह हकदार थे। उन महापुरुषों के द्वारा किए गए कार्यों का महत्व क्षेत्र या समुदाय तक सीमित नहीं था बल्कि देशव्यापी था। उन्होंने कहा कि सर छोटू राम के पुस्तक संग्रह का विमोचन करते हुए उन्हें अत्यंत हर्ष व संतोष की अनुभूति हो रही है, क्योंकि वह आज उनके व्यक्तित्व से जन मानस को परिचित कराने का माध्यम बन रहे हैं। सर छोटू राम ने ब्याज और कर्ज के कुचक्र से किसानों को मुक्ति दिलाकर उनकी भूमि को वापस दिलवाया। साथ ही किसानों के गिरवी रखे घरों, पशुओं को साहूकारों के कब्जे से भी बचाने में दीनबंधु छोटू राम का योगदान अतुलनीय रहा है। किसान अपनी उपज का सही दाम पा सकें, इसके लिए स्थानीय स्तर पर मंडियां स्थापित करवाने में भी उनकी सक्रिय भागीदारी रही है।
भाखड़ा बांध का श्रेय भी छोटू राम को दिया
उपराष्ट्रपति नायडू ने कहा कि सतलुज नदी पर भाखड़ा बांध की कल्पना सबसे पहले सर छोटू राम ने ही की थी और उसके निर्माण के लिए अंग्रेज सरकार तथा बिलासपुर के शासक से समझौता भी किया था। ऐसे में ये कार्य वही व्यक्ति कर सकता है जिसने किसानों और कृषि की समस्याओं को स्वयं अनुभव किया हो। उन्होंने कहा कि सर छोटू राम स्वयं एक किसान परिवार से थे। वे प्रखर लेखक, किसान मसीहा, शिक्षाविद व एक आदर्श राजनेता थे।
गरीबों के लिए जीवन पर्यंत लड़ते रहे छोटूराम : मनोहरलाल
मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने कहा कि महापुरुषों के जीवन दर्शन से वर्तमान और आने वाली पीढ़ी को परिचित करवाने के लिए पुस्तकें सर्वोत्तम माध्यम हैं। दीनबंधु सर छोटूराम के जीवन पर जिन पांच खंडों का लोकार्पण हुआ है, इनमें उनके जीवन दर्शन, उनकी राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक व प्रशासनिक सोच का बड़ा व्यापक वर्णन किया गया है। छोटूराम गरीबों और कमजोर वर्गों के लोगों के उत्थान व सम्मान के लिए जीवनपर्यंत लड़ते रहे। इस मौके पर भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़, प्रदेश के कृषि मंत्री जेपी दलाल, सांसद बृजेंद्र सिंह, सांसद धर्मबीर सिंह, हरियाणा उपक्रम ब्यूरो के चेयरमैन सुभाष बराला, राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा आदि मौजूद रहे।
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