शिक्षा की राह में कोरोना दो साल तक अड़चन बना रहा, लेकिन अब वैक्सीन का बूस्टर मिलने से बच्चों के चेहरों पर मुस्कान लौट आई है। एक अप्रैल से नया सत्र शुरू होने जा रहा है। इससे पहले ही वैक्सीन के लिए बच्चों में उत्साह भी जोरों पर है। बच्चे ही नहीं, अभिभावक भी स्कूलों में संपर्क साध रहे हैं और पूछ रहे हैं कि ‘मैडम वैक्सीन कब लगेगी...’। इस उत्साह को देखते हुए सोमवार से बच्चों का टीकाकरण शिविर लगाने वाले स्कूलों की संख्या 14 से बढ़कर 52 होने जा रही है। पेश है अमर उजाला संवाददाता योगेश शर्मा की रिपोर्ट...
निजी स्कूलों ने संभाली टीकाकरण की बागडोर
बच्चों के टीकाकरण की बागडोर निजी स्कूलों ने संभाली हुई है। जिले में 1,85,406 बच्चों के टीकाकरण का लक्ष्य रखा गया है। करीब 51 फीसदी यानी 95 हजार से ज्यादा बच्चों को वैक्सीन की पहली डोज दी जा चुकी है, जबकि 15 से 17 वर्ष के 51 हजार से अधिक बच्चों को दोनों डोज का सुरक्षा कवच मिल चुका है। 9 जनवरी से शुरू टीकाकरण की इस मुहिम की बागडोर निजी स्कूलों के हाथ में रही। जनपद में 138 यूपी बोर्ड और 205 सीबीएसई से संबंधित स्कूल हैं। निजी स्कूलों का टीकाकरण प्रतिशत 90 फीसदी से ज्यादा रहा है। हालांकि, निजी स्कूलों की तुलना में सरकारी स्कूल कम हैं।
वैक्सीन से बढ़ा आत्मविश्वास, छू कर निकल गया कोरोना
नोएडा के सेक्टर-तीन निवासी पीके अग्रवाल ने बताया कि कोरोना की दूसरी लहर का भयावह मंजर काफी डराने वाला था। इससे बचाने के लिए वैक्सीन के अलावा कोई दूसरा विकल्प दिखाई नहीं दे रहा था। अपने ही नहीं, बल्कि पत्नी प्रियंका, भाई हर्षित और उनकी पत्नी सुरभि और 67 वर्षीय मां इंदु को सितंबर आते-आते दोनों डोज लगवा दीं। पीके अग्रवाल बताते हैं कि बुरा समय बताकर नहीं आता, लेकिन बीमारी हो या मुसीबत अगर हौसला हो तो आसानी से निपटा जा सकता है। वैक्सीन लगवाने के बाद आत्मविश्वास बढ़ा है। जनवरी में कोरोना संक्रमित हुए, लेकिन वैक्सीन ने बचा लिया।
काउंसलर-डॉक्टर की मदद से दूर कर रहे डर
जनवरी में बच्चों का वैक्सीनेशन शुरू होने पर अभिभावक वैक्सीन को लेकर संकोच कर रहे थे, लेकिन स्कूल की तरफ से वीडियो कॉल कर अभिभावकों की काउंसिलिंग की गई। जागरूकता के लिए काउंसलर और डॉक्टरों की मदद ली गई। जिन बच्चों को शारीरिक परेशानी थी, उन्हें भी वैक्सीन के लिए प्रेरित किया गया। नतीजा 15 से 17 साल के स्कूल में पढ़ने वाले सभी बच्चों को दोनों डोज लग चुकी हैं। अब 12 से 14 साल के बच्चों के टीकाकरण पर जोर दिया जा रहा है। -ऋचा शर्मा, प्रधानाचार्या-राघव ग्लोबल स्कूल-नोएडा
सुरक्षित है वैक्सीन, लगवाने में देरी न करें
जनवरी से किशोरों का टीकाकरण शुरू हुआ था। आबादी लक्ष्य की तुलना में 44 फीसदी किशोरों को दोनों डोज का सुरक्षा कवच मिल चुका है। वैक्सीन के लिए जागरूकता लगातार बढ़ रही है। स्कूलों की भूमिका इसमें अहम रही है। अब 12 से 14 वर्ष के बच्चों का टीकाकरण शुरू हो गया है। वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है, अभिभावक अपने बच्चों को वैक्सीन लगवाने में किसी तरह का संकोच या देरी न करें। सोमवार से मेगा टीकाकरण शुरू होने जा रहा है, जिसमें बच्चों पर फोकस रहेगा। - डॉ. सुनील कुमार शर्मा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
बच्चे बोले
कोरोना संक्रमण के कारण दो साल तक स्कूल से दूर रहना पड़ा। ऐसा फिर से न हो इसके लिए सरकार ने वैक्सीन की सुविधा दी है, जिसका फायदा सभी को उठाना चाहिए। वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है।
-यश, छात्र
वैक्सीन का कोई दुष्प्रभाव मुझे नहीं दिखा। वैक्सीन लगने के बाद आत्मविश्वास जरूर बढ़ा है। इसके बाद भी मैंने भीड़भाड़ वाली जगह पर मास्क लगाना नहीं छोड़ा है। कोरोना से बचाव के सारे नियमों का पालन कर रहा हूं।
- सात्विक-छात्र
जिले का टीकाकरण
पहली डोज 22,12,479
दूसरी डोज 16,83,293
एहतियाती डोज 49,632
कुल टीकाकरण 39,45,404