सेक्टर-53 गिझोड़ मार्केट स्थित थोक व्यापारी परम सिंह चौहान ने बताया कि पिछले छह माह में आटे के दाम में आठ से दस रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है। देशी घी का दाम भी 300 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 550 रुपये प्रति किलो का आंकड़ा पार कर गया है। निम्न व औसत गुणवत्ता वाले चावल के दाम में भी करीब 10 से 30 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा दाल, चीनी, तेल आदि के दाम बढ़े हैं।
राशन के थोक विक्रेता अमित गोयल ने बताया कि छह माह पहले चीनी 28 से 30 रुपये प्रति किलो बिक रही थी जो मौजूदा समय में 40 रुपये तक पहुंच गई है। इसी तरह औसत बासमती चावल, परमल चावल, मंसूरी चावल, सरसों तेल, रिफाइंड ऑयल पर महंगाई का असर दिख रहा है। जिससे निम्न और मध्यम आय वर्ग क लोगों का बजट बिगड़ गया है।
क्या कहते हैं नौकरीपेशा
गलगोटिया विश्वविद्यालय की पुस्तकालय अध्यक्ष सुभद्रा बताती है कि पिछले दो सालों से उनके सैलरी में किसी प्रकार की बढ़ोतरी नहीं हुई है, जबकि खर्च करीब डेढ़ गुना बढ़ गया है। ऐसे में सैलरी और खर्च के बीच की सामंजस्य बैठाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। वहीं आईटी सेक्टर में काम करने वाले नरेंद्र यादव ने बताया कि कोविड काल में उन्हें पांच के लिए नौकरी से ब्रेक भी दे दिया गया था। इसके बाद दोबारा काम पर बुलाया गया तो सैलरी में किसी प्रकार की बढ़ोतरी नहीं हुई है। महंगाई प्रतिदिन बढ़ रही है। जिससे सामंजस्य बैठाना मुश्किल हो रहा है।
क्या कहती हैं गृहिणियां
पिछले एक साल से महंगाई ने कमर तोड़ रखी है। घर का पूरा बजट गड़बड़ा गया है। किचन में चटपटी और तली हुई चीजों का चलन कम हो गया है। महंगाई के कारण बचत में भी चपत लग रही है। - वंदना झा, गृहिणी
मौजूदा समय में आम लोगों के घर का बजट बिगड़ा हुआ है। सरसों तेल जो 140 रुपये प्रति लीटर मिलता था, आज 180-190 रुपये कीमत हो गई है। इसी तरह से किचन के अन्य सामान पर भी महंगाई का असर पड़ा है। - कविता, गृहिणी
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
आर्थिक मामलों के जानकार व अर्थशास्त्र के प्रोफेसर अरुण कुमार का कहना है कि महंगाई दर व वस्तुओं के दाम में अंतर है। लोगों में गलत धारणा है कि महंगाई दर कम होने से रोजमर्रा की चीजें सस्ती होंगी। दाम अभी भी बढ़ रहे हैं।