जेवर में निरीक्षण करती तहसील की टीम।
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जेवर। तहसील प्रशासन ने तीन गांवों में पराली जलाने वाले 15 किसानों पर पहली बार में 2.25 लाख रुपये जुर्माना लगाया है। दोबारा पकड़े जाने पर अधिक जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं, बिना स्ट्रीपर विद बाइंडर कंबाइन हार्वेस्टर मशीन (पराली खत्म करने में अक्षम मशीन) के मालिकों के खिलाफ कार्रवाई के लिए सहायक पुलिस आयुक्त को पत्र लिखा है। अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार को कृषि विभाग द्वारा गोविंदगढ़, जेवर बांगर व करौली बांगर में किसानों द्वारा धान की पराली जलाने की सूचना दी गई थी। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण के आदेश के अनुसार वर्ष 2015 से धान की पराली जलाने पर रोक है।
उपजिलाधिकारी जेवर रजनीकांत मिश्र ने कृषि विभाग की सूचना पर गांव में टीम भेज कर जांच कराई। इसमें गोविंदगढ़ में किसान राजीव व शेर सिंह के खेतों में पराली जली मिली। जेवर बांगर में अलावलपुर निवासी किसान नेम सिंह, रेवती प्रसाद, रामस्वरूप व करौली बांगर निवासी किसान अनवर खां के खेतों में पराली जलाने के अवशेष मिले। इसके अलावा किसान सूरजपाल सिंह, दमयंती, जगवीर, राजकुमार, धर्मेंद्र भाटी, महीपाल सिंह, रमेश, वेदवती आदि निवासीगण नगला कंचन माजरा के खेतों में भी पराली जलाने के अवशेष मिले। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण अधिनियम की धारा 24 के तहत प्रथम बार में 15000 रुपये प्रति किसान के हिसाब से जुर्माना लगाया गया है। वहीं, गोविंदगढ़, करौली बांगर व नगला कंचन के लेखपालों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। साथ ही खंड विकास अधिकारी कार्यालय के स्तर से ग्राम पंचायतों में पराली नहीं जलाने के लिए मुनादी कराई जा रही है।
एनसीआर में सबसे प्रदूषित रहा ग्रेटर नोएडा
दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण बढ़ना शुरू हो गया है। मंगलवार को ग्रेटर नोएडा एनसीआर का सबसे प्रदूषित शहर रहा। ग्रेनो का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 227 दर्ज किया गया। वहीं, शहर ऑरेंज जोन में पहुंच गया है। 170 एक्यूआई के साथ नोएडा येलो जोन में बना हुआ है। सर्दी शुरू होने के साथ ही दिल्ली एनसीआर वायु प्रदूषण की चपेट में आ जाता है। इसका असर दिखने लगा है। जल्द ही ग्रेनो का वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंचने की आशंका है। दिल्ली-एनसीआर में दूसरे नंबर पर फरीदाबाद रहा है। वहां का एक्यूआई 224 दर्ज किया गया। इनके अलावा बाकी सभी शहरों का एक्यूआई येलो जोन में रहा। दिल्ली का एक्यूआई 179, गाजियाबाद का 190, गुरुग्राम का 184 रहा। प्रदूषण की रोकथाम के लिए उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की तरफ से कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन यह कारगर साबित नहीं हो रहे हैं।